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जोधपुर / जेडीए-निगम में रहे दो आरएएस अफसरों पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज करने के आदेश



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  • बाबुओं की कारस्तानी पर डाला था पर्दा, बिना जांच-पड़ताल के जारी कर दिए थे चार पट्‌टे
  • जेडीए से शुरू हुआ भ्रष्टाचार का खेल निगम में पहुंचा, आयुक्त की आपत्ति भी नजरअंदाज  

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 03:59 AM IST

जोधपुर. पाली रोड पर अमृतादेवी तिराहे के पास जलदाय विभाग अपनी बेशकीमती जमीन का कब्जा नहीं छुड़ा पाया और कब्जाधारियों को फायदा देने के लिए जेडीए और नगर निगम के अफसरों ने उन्हें पट्‌टे भी जारी कर दिए। जबकि, दोनों महकमों में चली पत्रावलियों में काट-छांट भी नजर आ रही थी और नियमन राशि की गणना भी गलत हो रखी थी।

 

यही नहीं, निगम आयुक्त ने भी सही गणना के निर्देश दिए परंतु उपायुक्त ने जेडीए की गड़बड़ियों को अनदेखा कर पट्टे बांट दिए। मामला पांच साल पुराना है, परंतु अब एसीबी मुख्यालय ने जेडीए व निगम के आरएएस अफसरों व अन्य 8 कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में पहले पीई दर्ज हुई थी, उसकी जांच करने वाले एसआई रमेश खिड़िया ने निगम में उपायुक्त रहे प्रेमाराम परमार को जांच में सहयोग करने के लिए कई बार बुलाया, परंतु वे आए ही नहीं। आखिर में उन्होंने मुख्यालय में रिपोर्ट भेज कर मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा कर दी थी।  

 

पुखराज, दशरथ, ओमप्रकाश व भुट्‌टाराम के नाम से फाइल लगी। बाबू अशोक गिरी ने फाइल चलाई, मौका रिपोर्ट के लिए आेआईसी को भेजनी थी, पटवारी को दे दी। पटवारी ने तहसीलदार व उन्होंने एईएन-जेईएन को कह दिया। उन्होंने फाइल लौटा दी, परंतु गिरी ने दुबारा उसी चैनल पर फाइल भेज दी। चूंकि उस वक्त ओआईसी नहीं थे इसलिए खुद को ही मार्क दी और इन भूखंडों का 91 में नियमन नहीं करवा कर कच्ची बस्ती नियमन समिति में रखवा दिया।

 

इस समिति को 110 वर्गगज के भूखंडों के नियमन का अधिकार था और भूखंडों की वास्तविक साइज 200 वर्गगज से ज्यादा थी। पीसी राठौड़ ने ओआईसी का काम संभाला तो उन्होंने नियमन राशि लेकर पट्‌टे देना लिख दिया। नियमन राशि रिजर्व प्राइस की 50 प्रतिशत से ली जबकि मौजूदा आरक्षित दर से लेनी थी। यहीं पर मुख्य गड़बड़ी भूखंड का साइज 200 वर्ग से घटा कर 165 वर्ग गज का दिखाने की भी हुई। लीज डीड राशि भी आरक्षित दर पर नहीं ली गई।  

 

जेडीए की पत्रावलियां निगम को हस्तांतरित हुईं, उनमें ये चार फाइलें भी थीं। निगम अफसरों ने भी जेडीए की कार्रवाई सही मान कर फाइलें आगे बढ़ा दीं। नियमन राशि कम ले रखी थी, उसे चैक नहीं किया गया और 2008 की दर पर पट्‌टे दे दिए जबकि 2013 में दर अलग थी। हालांकि निगम के क्लर्क ने लिखा था कि ये मामले जेडीए से पारित हैं और नियमन राशि भी ले ली है, परंतु विधिक राय लेनी चाहिए तथा मौका रिपोर्ट दुबारा बनानी चाहिए।

 

उपायुक्त प्रेमाराम परमार ने लिख दिया कि जेडीए ने संपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली है, एक बार लीगल राय ले ली जाए। लीगल अफसर ने आपत्ति ही नहीं की, परंतु रमेश सतपाल ने चेता दिया कि राशि की गणना परिपत्र के हिसाब से नहीं है तब आयुक्त दुर्गेश बिस्सा ने गणना करने के निर्देश दिए, फिर भी बिना गणना के परमार ने पट्‌टे जारी कर दिए।   
 

दोनों के 5-5 आरोपी बनाए गए

जेडीए: आरएएस पीसी राठौड़, अतिक्रमण निरीक्षक विजयराज, क्लर्क अशोक गिरी, कच्ची बस्ती नियमन समिति के धर्मेंद्र बेनीवाल व रफीक मोहम्मद।

 

निगम: आरएएस प्रेमाराम परमार, लीगल अफसर सिद्दार्थ चारण, वरिष्ठ लेखाधिकारी दिलीप गुप्ता, जेईएन सुधीर पुरोहित व गुलाबचंद पारीक।

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