--Advertisement--

एक दिन में दो बड़े फैसले: बाड़मेर में 12 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या दो आरोपियाें को फांसी की सजा; नई खोली गईं 55 पॉक्सो कोर्ट में जजों की नियुक्ति

तीन अन्य आरोपियों रड़वा को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 07:32 AM IST
मासूम से दुष्कर्म के दोनों दोष मासूम से दुष्कर्म के दोनों दोष

आखिरकार...मासूम बच्चियों के गुनहगारों के खिलाफ मुहिम असर दिखाने लगी है। मंगलवार को ऐसे ही दो बड़े फैसले आए- पहला फैसला बाड़मेर से आया, जहां पांच साल पुराने 12 साल की बच्ची से दुष्कर्म -हत्या के बर्बर मामले में अदालत ने दो गुनहगारों को फांसी की सजा सुनाई। दूसरा फैसला जयपुर में हुआ- नई खोली गईं सभी 55 पॉक्सो कोर्ट को जज मिल गए। अदालतों में काम भी शुरू हो गया।

बाड़मेर. 12 साल की मासूस से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के दो आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई है। यह राज्य में दूसरा मौका है जबकि बदले हुए पॉक्सो कानून के तहत आराेपियों को फांसी की सज़ा हुई है। मामले का ट्रायल पांच साल तक चला।

क्या हुआ था? पांच साल पहले: मासूम से सामूहिक दुष्कर्म, सबूत मिटाने के लिए पहाड़ से फेंका था: 29-30 मार्च 2013 की रात. बाड़मेर के सदर थाना क्षेत्र का रड़वा गांव। घर के आंगन में मां के पास पलंग पर सो रही 12 साल की बच्ची का दरिंदों ने मुंह पर कपड़ा बांध अपहरण कर लिया और रात में घर से दूर पहाड़ी इलाके में ले गए। यहां उसके साथ घेवरसिंह राजपुरोहित और श्रवणसिंह ने दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के सबूत मिटाने की नीयत से बालिका को बेहोशी की हालत में पहाड़ी से नीचे फेंककर उसकी हत्या कर दी। मामले में अदालत ने सुनवाई पूरी करके बाद दोनों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने घेवर सिंह और श्रवणसिंह को फांसी की सजा सुनाई। जबकि तीन अन्य आरोपियों प्रहलाद सिंह, नरसिंह व शंकरसिंह निवासी रड़वा को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

पिता को डरा-धमकाकर बदलवाया मामला, लेकिन मां डटी रही... आरोपियों ने बालिका के पिता को डराया-धमकाया। बच्ची के पागल होने और स्वत: गिरकर मौत होने का मामला पिता के जरिए दर्ज करवाया, पीड़िता की मां डटी रही। बेटी के साथ हुए गैंगरेप, अपहरण के बाद हत्या की रिपोर्ट महिला थाने में दी। तत्कालीन डीएसपी नाजिम अली ने तीसरे दिन ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया।

कोर्ट ने आदेश में लिखा... आदेश में कोर्ट ने लिखा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 366 के अनुसार मृत्यु दंड को तब तक निष्पादित नहीं किया जाए तब तक राजस्थान उच्च न्यायालय इसकी पुष्टि नहीं कर दे। दोनों मुख्य आरोपियों घेवरसिंह व श्रवणसिंह साठ दिन के भीतर उच्च न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

फैसला सुनाते हुए जज बोलीं: यह पाशविक तरीके से की गई हत्या है। मानवीयता के विरुद्ध सबसे निम्न स्तर का कृत्य। नृशंस हत्या की वजह से यह मामला विरल से विरल की श्रेणी में आता है। इसके लिए सिर्फ मृत्यु दंड देना न्याय प्राप्ति के लिए बाध्यकारी होगा। -जज वमीता सिंह

इधर... नई खोली गईं 55 पॉक्सो कोर्ट में जजों की नियुक्ति

जयपुर. राज्य सरकार के प्रदेश में 55 नई पोक्सो कोर्ट खोलने की मंगलवार को अधिसूचना जारी करने के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने इन सभी स्पेशल कोर्ट में पीठासीन अधिकारियों को लगा दिया। हालांकि, इन सभी कोर्ट का फिलहाल अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसके साथ ही इन अदालतों ने काम-काज शुरू कर दिया गया है।

राजस्थान देश का पहला राज्य बना: राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है, जहां 35 ज्युडिश्यरी जिलों में एक-एक पोक्सो कोर्ट के साथ-साथ 21 अतिरिक्त पोक्सो कोर्ट खोले गए हैं। इससे प्रदेश में न केवल बच्चियों बल्कि, महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों के निस्तारण में तेजी जाएगी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पिछले दिनों प्रदेश में 55 पोक्सो कोर्ट खोले जाने की स्वीकृति थी। जयपुर सिटी में 6, कोटा में 5, अलवर में 4, पाली में 3 और अजमेर, बारां, भरतपुर, उदयपुर, झालावाड़, भीलवाड़ा व बूंदी में 2-2 पोक्सो कोर्ट खुलेंगे, 23 जिलों में एक-एक कोर्ट खोली गई है। मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए अब प्रदेशभर में कुल 56 पोक्सो कोर्ट हो जाएगी। जयपुर में एक कोर्ट पहले ही कार्यरत है। जयपुर की सभी छह कोर्ट का चार्ज पोक्सो कोर्ट के स्पेशल जज दलीप सिंह को सौंपा गया है।

X
मासूम से दुष्कर्म के दोनों दोषमासूम से दुष्कर्म के दोनों दोष
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..