आर्मी ने इस साल को वाॅर डिसेबल ईयर घोषित किया, इसीलिए ऐसे 3 जवानों की कहानियां...

4 वर्ष पहले
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* आर्मी ने इस साल को वार डिसेबल ईयर घोषित किया है।

* 2002 में सेना का वार वाउंडेड फाउंडेशन बनाया गया। युद्ध घायलों को सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के लिए करता है मदद।
* युद्ध घायलों के लिए 16 साल से सेना का फंड भी चल रहा है।

जोधपुर। सेना के कई जवान जंग में या किसी ऑपरेशन में बुरी तरह घायल हो जाते हैं। कई बार तो शरीर का कोई अंग ही गंवाना पड़ जाता है। लेकिन जज्बा तो वही सेना वाला होता है, तो ये कमी भी कमजोरी कैसे बन सकती है। कई जवानों ने इससे उबरते हुए जिंदगी को और मजबूती के साथ शुरू किया। ऐसी ही 3 कहानियां...

कर्नल पिल्लई : रीढ़ डैमेज हुई पर 200 युवाओं को सेना ज्वाइन कराई

- कर्नल दिवाकर पदम कुमार पिल्लई को 1988 में थलसेना की 8 गार्ड्स यूनिट में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमिशन मिला था। 1994 में वो मणिपुर के उग्रवादी क्षेत्र में कप्टै न थे। 25 जनवरी को लोंगडी पबरम गांव में उग्रवादियों ने एक घर पर हमला किया।

- मुठभेड़ में कर्नल का दाहिने पैर का पंजा खराब हो गया। दाएं हाथ और सीने में 4 गोलियां लगीं। रीढ़ की हड्डी भी टूट गई। इलाज के बाद कर्नल 1996 से 2000 तक बेंगलुरू के मिलिट्री स्कूल में रहे और बच्चों को एनडीए ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करते रहे। उनसे प्रभावित होकर 200 से ज्यादा युवा फौज में गए।

- लोंगडी पबरम गांव में उन्होंने 50 से ज्यादा युवतियों को नर्स की ट्रेनिंग और रोजगार दिलाया। बेंगलुरू के निजी अस्पताल से एग्रीमेंट कराया। वे मई 2017 में सेना से रिटायर हुए।

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