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राजस्थान चुनाव / भाजपा के लिए टेढ़ी खीर हुआ प्रत्याशियों का चयन करना, एक बार फिर वसुंधरा राजे और अमित शाह आमने-सामने



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • अगले दो दिन में एक सौ प्रत्याशियों के नाम की लिस्ट आने की संभावना

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 11:06 AM IST

जोधपुर. राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन करना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर हो गया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अधिक से अधिक वर्तमान विधायकों के टिकट बरकरार रखने के पक्ष में है जबकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आधे से अधिक विधायकों के टिकट काटने के पक्ष में है।

 

वसुंधरा राजे का जोर पार्टी और उनके स्वयं के प्रति वफादारों के हितों की रक्षा करने पर है वहीं शाह का जोर जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में है। शाह और वसुंधरा के बीच टिकटों को लेकर चल रही इस खींचतान में कौन हावी रहेगा यह सूची आने के बाद ही पता चल पाएगा।  


प्रदेश में कई दिन तक मंथन करने के पश्चात मुख्यमंत्री राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास 95 नाम की सूची लेकर गई थी, लेकिन अमित शाह ने पूरी कवायद नए सिरे से करने का फरमान जारी कर उन्हें बेरंग लौटा दिया था। इसके बाद सभी जिलों में नए सिरे से हुए कवायद के बाद सामने आए नाम देख वसुंधरा राजे की परेशानी बढ़ गई।

 

उनके चहेते कई विधायकों और यहां तक की करीब आधा दर्जन मंत्रियों तक के टिकट कटने की नौबत आ रही है। इस सूची का शाह के पास विभिन्न सर्वे रिपोर्टों के आधार पर तैयार सूची से मिलान किया जाएगा। इन सर्वे रिपोर्ट में पार्टी और संघ के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ता होने के साथ क्षेत्र के जातिय समीकरण के अनुसार उसके जिताऊ होने के आधार पर नाम शामिल किए गए है।

 

साथ ही पहले से विभिन्न पदों पर नियुक्त कार्यकर्ताओं के स्थान पर एकदम नए चेहरे को प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों सूचियों में शामिल नाम वाली सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा दो दिन में कर दी जाएगी। शेष सीटों पर इसी तरह से फिर से मशक्कत कर नाम घोषित किए जाएंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पहली सूची में सौ के आसपास नाम शामिल हो सकते है। 
शाह की तरफ से अपनाई गई इस प्रक्रिया से आधे से अधिक विधायकों के टिकट कटने की नौबत आ रही है।

 

वसुंधरा राजे का पूरा जोर अपने समर्थक विधायकों के टिकट अधिक से अधिक संख्या में बरकरार रखने पर है। ऐसे में शाह और वसुंधरा राजे के बीच एक बार फिर तनातनी के हालात बन रहे है। कुछ माह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पद पर शाह अपनी पसंद के गजेन्द्र सिंह शेखावत की नियुक्ति मुख्यमंत्री के विरोध के कारण नहीं कर सके थे। यह टीस उनके मन में अभी भी कायम है।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के कार्यकाल में यह पहला अवसर था जब उन्हें किसी मुख्यमंत्री के कारण बैकफुट पर आना पड़ा। अब अमित शाह ने बेहतर तरीके से वसुंधरा राजे की घेराबंदी की है। ऐसे में यही लग रहा है कि इस बार शाह की चलेगी और बड़ी संख्या में वर्तमान विधायकों के टिकट पर कैंची चलेगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के 200 सीटों में से वर्तमान में भाजपा के 163 विधायक है। भाजपा प्रदेश में अपनी सरकार बरकरार रखने को पूरा जोर लगा रही है। 
 

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