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विधानसभा चुनाव / बिछ गई चुनावी चौसर, लेकिन जोधपुर में कांग्रेस-भाजपा अभी तक तलाश नहीं पाए अपने मोहरें



जोधपुर शहर। जोधपुर शहर।
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जोधपुर शहर।जोधपुर शहर।
  • जोधपुर शहर, सूरसागर व सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2018, 12:28 PM IST

जोधपुर. चुनावी चौसर बिछ चुकी है, लेकिन राजनीतिक दल अभी तक अपने-अपने मोहरों की तलाश में ही व्यस्त है। जोधपुर शहर के तीन विधानसभा क्षेत्रों में कमोबेश ऐसे ही हालात बने हुए है। भाजपा और कांग्रेस अभी तक  जिताऊ प्रत्याशी तलाश नहीं पाए है।

 

दोनों दलों की इस दुविधा ने दावेदारों की सांस ऊपर-नीचे कर रखी है। कभी किसी दावेदार का नाम ऊपर तो कभी नीचे हो रहा है। सियासी समीकरण का अच्छी तरह से ठोक बजा कर दोनों दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेंगे। 


सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे है पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। लगातार चार बार यहां से विधायक रह चुके गहलोत एक बार फिर से मैदान में नजर आएंगे।वहीं भाजपा ने चारों बार उनके खिलाफ अलग-अलग प्रत्याशी उतार प्रयोग किए, लेकिन वे एक बार भी गहलोत को इस क्षेत्र में बांध कर नहीं रख पाए। अब एक बार फिर भाजपा पसोपेश में है कि किसे गहलोत के सामने  उतारे। कहने को तो कई नाम सामने आ रहे है लेकिन कई लोग गहलोत के सामने पीछे भी हट रहे है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि भाजपा यहां से किसे मैदान में उतारती है। 


सूरसागर विधानसभा क्षेत्र में दोनों दलों की गणित इस बार कुछ उलझी नजर आ रही है। यहां से लगातार दो चुनाव जीत चुकी सूर्यकांता व्यास के स्थान पर भाजपा इस बार नए चेहरे की तलाश में है। इतना तय है कि पार्टी यहां से किसी ब्राह्मण चेहरे पर ही दाव लगाएगी। पार्टी की तरफ से यहां से भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत घोष, महापौर घनश्याम ओझा व पूर्व मंत्री राजेन्द्र गहलोत सहित कई अन्य दावेदारों के नाम सुर्खियों में चल रहे है।

 

जबकि कांग्रेस मुस्लिम या गैर मुस्लिम में उलझी है। कांग्रेस यहां से लगातार दो बार मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतार चुकी है, लेकिन दोनों बार मात खानी पड़ी। ऐसे में इस बार पार्टी किसी ब्राह्मण प्रत्याशी पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। कांग्रेस के समक्ष सबसे बड़ी परेशानी यह है कि यदि यहां से ब्राह्मण जाति को अवसर नहीं दिया तो पूरे संभाग में इस जाति के लिए अन्य कोई दूसरी सीट सुविधाजनक नहीं है। ऐसे में कांग्रेस दुविधा में है किसे मैदान में उतारे। उसकी तरफ से पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच, आनन्द पुरोहित, अयूब खान, लियाकत अली व गत  चुनाव हार चुके जैफू खान अपने बेटे के लिए प्रयास कर रहे है। 


परिसीमन के पश्चात जोधपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के समीकरण पूरी तरह से बदल गए। अब यहां अमूमन वैश्य समाज के दो लोगों के बीच मुकाबला देखने को मिलता है। कांग्रेस अथक प्रयास के बावजूद लगातार तीन बार यहां से हार चुकी है। ऐसे में यह सीट कद्दावर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। पार्टी यहां से किसी नए चेहरे की तलाश में है। वहीं भाजपा भी यहां से किसी नए चेहरे को मैदान में उतारने की तैयारी में है।

 

दोनों पार्टियों से कई नाम उभर कर सामने आ रहे है, लेकिन अभी तक किसी नाम पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। भाजपा से मुख्य दावेदार उप महापौर देवेन्द्र सालेचा व जितेन्द्र लोढ़ा तो कांग्रेस की तरफ से अनिल टाटिया व पिछला चुनाव हार चुके सुपारस भंडारी का प्रमुखता से लिया जा रहा है। इनके अलावा भी कई चेहरे टिकट की दौड़ में शामिल है। इस क्षेत्र में मूल ओबीसी जातियों का दबदबा बढ़ा है। ऐसे में खम ठोक वे भी अपना दावा जता रहे है।
 

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