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  • Jodhpur News Rajasthan News 10 Years Of Rigorous Imprisonment 50 Thousand Rupees Accused Of Raping A Married Woman Penalties Too

शादी का झांसा दे नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल का कठोर कारावास, 50 हजार रु. अर्थदंड भी

2 वर्ष पहले
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पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश अखिलेशकुमार ने यौन अपराधों से बालकों को संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3/4 के तहत एक युवक यशदीप पेवा को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास व 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। नाबालिग पीड़िता ने युवक पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने को लेकर 6 साल पहले चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। मामले के अनुसार 8 जून 2013 को पीड़िता ने पुलिस थाना चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि, वह दसवीं कक्षा की छात्रा है। वह दांतों के ईलाज के लिए डॉ. प्रेक्षा से मिली और अपना इलाज करवा रही थी। उसी दरम्यान डॉ. प्रेक्षा ने अपने भाई यशदीप पेवा पुत्र मदन पेवा से उसका परिचय करवाया और हमारी दोस्ती करवाई। डॉ. प्रेक्षा ने लव मैरिज की थी और अपने पति से भी उसका परिचय करवाया। उन दोनों ने आरोपी के साथ दोस्ती बढ़वाई और उसके साथ कई फोटोग्राफ भी खींचे। डॉ. प्रेक्षा ने उसे यह भी कहा कि वो अपने भाई से उसकी शादी करवाकर उसे भाभी बनाना चाहती है। आरोपी यश की मम्मी को भी यह रिश्ता मंजूर हो गया था और वह उनकी पारिवारिक सदस्य बन गई। उससे कहा कि जैसे ही वह 18 साल की हो जाएगी, उसे शादी करके अपने घर ले आएंगे। इस बीच आरोपी ने उससे शादी का वादा किया और उससे संबंध बना लिए। इसके बाद कई बार संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती भी हो गई। जब उसने शादी करने की बात कही तो बदले में एक करोड़ की मांग की। पैसे नहीं मिलने पर उसने शादी नहीं की। अपर लोक अभियोजक दिनेश कुमार शर्मा ने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने का आग्रह किया।

पीड़िता व आरोपी के बीच दोस्ती 2012 से शुरू हुई थी
दोनों पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, कि पीड़िता व आरोपी के बीच दोस्ताना संबंध वर्ष 2012 से शुरू हो गए थे, जिसकी पुष्टि आरोपी के मोबाइल से पेनड्राइव में फोटोग्राफ के प्रिंट से बखूबी होती है। पीड़िता व आरोपी के बीच मधुर संबंध थे व पीड़िता ने अपनी साक्ष्य में आरोपी द्वारा उसे शादी का वादा कर बार-बार ब्लैकमेल कर शारीरिक संबंध बनाए जाने का कथन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में अनुराग सोनी बनाम स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ आदेश में यह मत प्रतिपादित किया है, कि शादी का झूठा झांसा देकर अगर सहमति लेकर भी संबंध बनाए गए हैं तो आरोपी सहमति के आधार पर दुष्कर्म के आरोप से मुक्ति नहीं पा सकता। पीड़िता वक्त घटना नाबालिग थी, ऐसी स्थिति में पीड़िता की सहमति का विधिक दृष्टि से कोई महत्व नहीं रह जाता है।

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