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‘बीवियों का मदरसा’ ने दी सीख कि सपने हकीकत में बदलने हैं तो दिमाग में शक का कीड़ा न पालें

Jodhpur News - जोधपुर | राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से 25वें ओम शिवपुरी स्मृति नाट्य समारोह में मंगलवार को बीवियों का मदरसा...

Dec 18, 2019, 08:55 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news 39madisah of wives39 has learned that if dreams are to be turned into reality then do not feed the worm of doubt
जोधपुर | राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से 25वें ओम शिवपुरी स्मृति नाट्य समारोह में मंगलवार को बीवियों का मदरसा नाटक का सफल मंच किया गया। इसमें दमदार संवाद और कलाकारों के बेहतरीन अभिनय के साथ यह सीख दी गई कि व्यक्ति को दिमाग में शक का कीड़ा नहीं पालना चाहिए। जयपुर के इस उर्दू नाटक का रूपांतरण बलराज पंडित व सुरेखा सीकरी ने किया और सूफियान खान ने निर्देशित किया। लेखन मौलियार ने किया। भावुक संवादों जैसे दुनिया में कोई ऐसा शख्स है, जो अपनी बीवी की बेवफाई बर्दाश्त करे और वो भी नरमी के साथ..., औरत सिर से पांव तक ढकी रहे और निगाह जमीन पर रहे... से शुरू हुए नाटक में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताई गई जो औरतों को हमेशा बेवफा मानता आया है और उन पर शक करता रहता है, इसीलिए उसने शादी नहीं की। फिर वह लापता हुई छह साल की लड़की को घर ले आता है और उसे पढ़ा-लिखाकर शादी की उम्मीदें बांधता है। उसे किताबें पढ़ाता है और दो नौकरों से उसे पूरी तरह अपनी सोच में ढालने की कोशिश करता है। लड़की की परवरिश करते हुए यही सोचता है कि जब यह बड़ी होगी तो उससे शादी करूंगा और यह मेरे जैसी ही होगी तो अच्छी जोड़ी बनेगी, लेकिन एक दिन खिड़की में झांकते हुए लड़की की नजर एक लड़के गुलफाम पर पड़ती है और दोनों प्यार होने पर शादी करने की सोचते हैं। इसी बीच लड़की के माता-पिता भी उसे ढूूंढ़ते हुए वहां पहुंचते हैं और लड़का भी उनका परिचित निकलता है। माता-पिता लड़की को ले जाते हैं आैर धूमधाम से शादी करते हैं, लेकिन उम्मीदें बांधता व्यक्ति फिर कुंवारा रह जाता है।

हैप्पी एंडिंग वाले इस कॉमेडी नाटक में एक साथ कई विचारों और मन स्थितियों को दिखाने का प्रयास संवाद व भाषा के माध्यम से किया गया। निर्देशक खान ने बताया कि नाटक के माध्यम से दिखाया है कि किस प्रकार व्यक्ति के दिमाग में शक उसे कहीं का नहीं छोड़ता है और वह सपने तो बुन लेता है, लेकिन हकीकत नहीं बना पाता है। इसमें विनोद सोनी, ईशिता, गरिमा, नरेश, विकास यादव और अजय ने अभिनय किया।

28वां ओम शिवपुरी स्मृति नाट्य समारोह

आज : ‘मंटो हाजिर हो’ समय : 7 बजे

टाउन हॉल में मंचित नाटक ‘बीवियों का मदरसा’ का एक भावपूर्ण दृश्य।

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