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- Balesar News Rajasthan News 61 Years Ago After Leaving Patwari39s Job He Was Made Sarpanch Of Bawarli Govind Singh Came Here In 1968 To See The Situation Of Severe Famine
61 साल पहले पटवारी की नौकरी छोड़ बावरली के सरपंच बने थे गोविंदसिंह 1968 में भीषण अकाल के हालात देखने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां आईं थीं
61 साल पहले गोविंदसिंह राजपुरोहित पटवारी की नौकरी छोड़कर बावरली गांव के शिक्षित एवं युवा सरपंच बने थे। उनके कार्यकाल में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां अकाल के हालात देखने आई थीं। राजपुरोहित 1959 से 1987 तक लगातार 28 साल तक सरपंच रहे। इनके समय की ग्राम पंचायत बावरली से अलग होकर अब पांच ग्राम पंचायतें नई बन चुकी है। इनके कार्यकाल में इंदिरा गांधी अकाल राहत का निरीक्षण करने 1968 में बासनी मनणा ग्राम पंचायत आयी थी। राजपुरोहित के पुत्र जबरसिंह ने बताया कि उनके पिता गोविंदसिंह राजपुरोहित ने 1947 में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। उन्होंने देश की आजादी के लिए रैलियों में भाग लिया था। 1950 में उनकी पटवारी की नौकरी लगी थी। मगर शिक्षित होकर गांव की सेवा करने के लिए उन्होंने 1953 में चार साल बाद पटवारी की नौकरी छोड़ दी। 1959 में पहली बार ग्राम पंचायत बावरली के सरपंच बने। वे खेतसिंह राठौड़ के खास कार्यकर्ता थे।
रातोंरात बनाया था इंदिरा गांधी के लिए स्टेज, यहीं पर लोगों से मिली
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1968 में अकाल राहत कार्यों का निरीक्षण करने ग्राम पंचायत बावरली के राजस्व गांव बासनी मनणा गांव हेलीकॉप्टर से आई थीं। इंदिरा गांधी ने जहां भाषण दिया, उस जगह रातोंरात पक्का चबूतरा बनाया गया। इंदिरा गांधी के दौरे के बाद ही पेयजल के लिए मणाई नलकूप से बड़ी पाइप लाइन डाली थी। जाे 20 पंचायतों में फैली हुई है। पानी की पाइपलाइन की बदौलत लोग पलायन से बच गए। उन्होंने बंबोर से चामू ग्रेवल सड़क, पंचायत भवन, 50 बड़े टांके, प्रत्येक राजस्व गांव में स्कूल, जलकुंड, पटवार भवन, पीएचसी का निर्माण कराया। 1981 में विद्युतीकरण करा दिया।
पंचायत चुनाव-2020
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पूर्व सरपंच स्व. गोविन्दसिंह राजपुरोहित