149 साल बाद गुरु पूर्णिमा पर रहेगा चंद्र ग्रहण का साया

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:05 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news after 149 years guru purnima will remain on the moon eclipse

कम्युनिटी रिपोर्टर | जोधपुर

आगामी 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर 149 साल बाद इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण रहेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत समेत यूरोप अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी एवं दक्षिण पूर्व अमेरिका प्रशांत एवं हिंद महासागर से नजर आएगा।

इस साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण काफी अहम रहेगा, क्योंकि 149 साल बाद गुरु पूर्णिमा के दिन ग्रहण लग रहा है। पिछली बार 12 जुलाई 1870 को गुरु पूर्णिमा के ही दिन ऐसा चंद्र ग्रहण लगा था, जिसका राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ा था। ज्योतिषों के अनुसार उस ग्रहण के दौरान चंद्रमा शनि, राहू और केतू के साथ धनु राशि में था। इस बार भी ऐसा ही कुछ होने जा रहा है। पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी के अनुसार इस चंद्र ग्रहण का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।

इसलिए मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी।


महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी गुरु पूर्णिमा को है। वे संस्कृत के विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था, वे कबीरदास के शिष्य थे।


शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है। यानी अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है।

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