पीएम व सीएम से अपील, वतन में रहते घर वापसी क्यों नहीं

Jodhpur News - प्रदेश के बाहर मजदूरी के लिए गए लोगों को कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते अब अपने घरों में लौटना मुश्किल हो गया...

Mar 27, 2020, 09:46 AM IST
Shergar News - rajasthan news appeal to pm and cm why not return home while living in the country

प्रदेश के बाहर मजदूरी के लिए गए लोगों को कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते अब अपने घरों में लौटना मुश्किल हो गया है। शेरगढ़ क्षेत्र के देवराजगढ़ निवासी मनोहर कुमावत व बारू तहसील फलोदी निवासी नारायणराम प्रजापत का कहना है कि फर्नीचर के कार्य के लिए शेरगढ़ क्षेत्र के देवराजगढ़, शेरगढ़, बालेसर, देचू, फलसुंड, बावरली व फलोदी आदि इलाकों के ग्रामीण मजदूरी के महाराष्ट्र गए थे। कोरोना प्रकोप के मद्देनजर जब वे गुजरात- राजस्थान बॉर्डर पर अपने प्रदेश लौटने के लिए पहुंचे। जहां उन्हें पुलिस ने राजस्थान में घुसने नहीं दिया। इस पर उन्हें करीब 18 किमी भीवंडी से खोपोली वापस पैदल ही लौटना पड़ा। जहां पाली गोदाम में रहने को मजबूर है। जहां नजदीक में एकमात्र दुकान है। इस स्थिति में उनके लिए खाने पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत, अर्जुनराम व कैलाश चौधरी से अपील की है कि उन्हें राजस्थान में प्रवेश दिलाकर अपने घरों में पहुंचाने के लिए व्यवस्था कराएं। निर्धन परिवारों के लोग सूरत, पुना, बैंगलोर, अहमदाबाद, मुंबई, मद्रास आदि आउट ऑफ स्टेट मजदूरी के लिए गए थे। लॉकडाउन के चलते उनके वहां राशन पानी की भी व्यवस्था नहीं है। वे सभी जैसे तैसे निकल कर अपने गांव जाना चाहते हैं। 21 दिन बंद रहने से राशन के पैसे भी नहीं है। रोज मजदूरी करने वाला आदमी कहां से लाएगा राशन का खर्चा व ऊपर से सभी बंद है काम पर जाए तो कहां जाए। गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पर पुलिस उन्हें अंदर नहीं आने दे रही है। जो मजदूर शेष रह गए है वे कहां जाएंगे। उनके राजस्थान के बाहर कहीं भी स्थाई ठिकाने नहीं है। दूसरे राज्य वाले भी उन्हें वापिस अंदर नहीं आने दे रहे है। इधर शेरगढ़ विधायक मीना कंवर व पीसीसी सदस्य उम्मेदसिंह राठौड़ ने सरकार से मांग की है, लेकिन प्रधानमंत्री के निर्देशों की पालना करते हुए किसी को लाना अभी मुश्किल है।

मजदूरी बंद हुई तो जोधपुर से बारा के लिए पैदल ही निकला परिवार, रात्रि विश्राम बिलाड़ा में किया

बिलाड़ा| कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा हैं। संक्रमण से बचाव के चलते सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा की व धारा 144 लगाई। इसके चलते सारे कामकाज ठप हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा मुसीबत मजूदरों को झेलनी पड़ रही हैं। ऐसा ही एक दृश्य बुधवार रात्रि में देखने को मिला। लॉकडाउन के चलते मजदूरी बंद होने व आवागमन के साधन बंद होने के कारण एक परिवार पैदल ही जोधपुर से अपने गांव के लिए रवाना हुआ। ये परिवार बुधवार रात्रि बिलाड़ा बस स्टैंड ट्रेफिक घूमटी के पास ही रात गुजारी। परिवार में बच्चों व महिलाओं सहित लगभग एक दर्जन लोग शामिल हैं। रमेश (45) पुत्र किशनलाल निवासी जिला बारा ने बताया की हम जोधपुर में मजदूरी का कार्य करते हैं व परिवार सहित रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मजदूरी बंद हो गई है व खाने-पीने की भी नौबत आ गई है। ऐसे में हमारे पास अपने गांव बारा जाने के लिए अलावा कोई चारा नहीं है। रमेश ने बताया की बसें नहीं है तो हम पैदल ही गांव के लिए रवाना हुए। उसने बताया कि 25 मार्च को दोपहर 12 बजे हम जोधपुर से पैदल रवाना हुए व 26 मार्च शाम को बिलाड़ा पहुंचे। यहां पर खाना खाया व यहीं विश्राम किया तथा गुरुवार सुबह अपने गांव के लिए रवाना हुए।

गुजरात -राजस्थान की सीमा पर वापस लौटाया

महाराष्ट्र में फंसे शेरगढ़ के लोग

गोदाम में रहने को मजबूर है। जहां नजदीक में एकमात्र दुकान है। इस स्थिति में उनके लिए खाने पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत, अर्जुनराम व कैलाश चौधरी से अपील की है कि उन्हें राजस्थान में प्रवेश दिलाकर अपने घरों में पहुंचाने के लिए व्यवस्था कराएं। निर्धन परिवारों के लोग सूरत, पुना, बैंगलोर, अहमदाबाद, मुंबई, मद्रास आदि आउट ऑफ स्टेट मजदूरी के लिए गए थे। लॉकडाउन के चलते उनके वहां राशन पानी की भी व्यवस्था नहीं है। वे सभी जैसे तैसे निकल कर अपने गांव जाना चाहते हैं। 21 दिन बंद रहने से राशन के पैसे भी नहीं है। रोज मजदूरी करने वाला आदमी कहां से लाएगा राशन का खर्चा व ऊपर से सभी बंद है काम पर जाए तो कहां जाए। गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पर पुलिस उन्हें अंदर नहीं आने दे रही है। जो मजदूर शेष रह गए है वे कहां जाएंगे। उनके राजस्थान के बाहर कहीं भी स्थाई ठिकाने नहीं है। दूसरे राज्य वाले भी उन्हें वापिस अंदर नहीं आने दे रहे है। इधर शेरगढ़ विधायक मीना कंवर व पीसीसी सदस्य उम्मेदसिंह राठौड़ ने सरकार से मांग की है, लेकिन प्रधानमंत्री के निर्देशों की पालना करते हुए किसी को लाना अभी मुश्किल है।

सैकड़ोंं युवा हजारों किमी दूरी तय कर जैसे-तैसे पहुंच रहे हैं अपने घर

लोहावट| कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव को लेकर मंगलवार को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद गुजरात, महाराष्ट्र में काम करने वाले मारवाड़ के लोगों को वहां से छुट्टी देकर रवाना किया जा रहा हैं। हैरानी की बात यह है जो गुजरात से मारवाड़ की तरफ आ रहे हैं उन्हें न तो वहां से बस मिल रही हैं, न हीं ट्रेन व अन्य वाहन। ऐसे में कुछ लोग पैदल आ रहे हैं। कुछ लोग निजी वाहन या अधिक किराए पर उपलब्ध वाहन को लेकर घर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हालात यह है कि लोहावट क्षेत्र के अधिकांश युवा वर्ग बाहर गुजरात, अहमादाबाद, सूरत, महाराष्ट्र, पूना आदि जगह मजदूरी करने गए थे। ऐसे में संकट की स्थिति में वहां से मारवाड़ी लोगों को निकाला जा रहा हैं। करीब 1000-1500 किलोमीटर की दूरी जैसे-तैसे तय करके गांव में अपने घरों की ओर आ रहे हैं। ऐसे में कुछ युवा सरकारी अस्पताल लोहावट में स्क्रीनिंग जांच करवाने भी आए। कुछ को होम आइसोलेशन में निगरानी रखी जा रही हैं।

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