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यूजीसी मान्यता बिना आयुर्वेद विवि खुद 5 साल से चला रहा था कोर्स, अब निजी कॉलेजों को भी दी अनुमति
जोधपुर| डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के जिम्मेदार विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। विवि के जिम्मेदारों ने 2015 में बीएससी नर्सिंग इन आयुर्वेद का कोर्स बिना यूजीसी की अनुमति के ही शुरू तो कर ही दिया, बाद में भी इस कोर्स की मान्यता यूजीसी से लेने के लिए प्रयास नहीं किए। चार साल तक अपने यहां बिना मान्यता के यह कोर्स चलाने के बाद पिछले साल विवि ने झुंझुनूं, रींगस और सीकर की निजी कॉलेजों को यह कोर्स चलाने की अनुमति देकर वहां भी 30-30 सीटों पर प्रवेश दिला दिए। अब विद्यार्थी पशोपेश में हैं कि चार साल का कोर्स करने के बावजूद वे ग्रेजुएट की श्रेणी में नहीं आ रहे और न ही किसी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो पा रहे हैं। परेशान विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर 18 मार्च तक यूजीसी से मान्यता सहित सरकार से सेवा नियम संबंधी निर्णय नहीं हुए तो आंदोलन किया जाएगा। यह जोधपुर सहित पूरे प्रदेश स्तर पर चलेगा।
आयुर्वेद विवि में बीते पांच सालों में 200 से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ चुके हैं। ऐसे में इन सबके भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि उन्होंने जो कोर्स किया है, उसकी डिग्री को यूजीसी ने मान्यता नहीं दी है। विवि की ओर से से इस कोर्स के लिए यूजीसी से स्वीकृति लेने के प्रयास भी नहीं किए गए। इधर, यूजीसी की मान्यता नहीं होने से सरकार के पास भी कोई योजना नहीं है और ना ही सेवा नियमों में इसको जोड़ा गया है। इस वजह से यहां कोर्स करने वाले विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं बैठ पा रहे हैं। हालांकि विवि प्रशासन का कहना है कि सरकार से लेकर यूजीसी स्तर तक वार्ता चल रही है और शीघ्र ही मामले का हल निकाल लिया जाएगा। इधर, बीएससी नर्सिंग इन आयुर्वेद के स्टूडेंट्स का कहना है कि प्रशासन लंबे समय से केवल बहाने बना रहा है। अब उनका भविष्य दांव पर लगा है।
पांच साल क्या किया विवि ने| विवि ने 2015 में बीएससी नर्सिंग इन आयुर्वेद कोर्स शुरू कर दिया था लेकिन तब से मान्यता को लेकर कोई खास प्रयास नहीं किए गए। पूर्व कुलपति की ओर से भी प्रयास नाकाफी रहे। ऐसे में स्टूडेंट्स खुद को ठगा हुआ पा रहे हैं। उनका कहना है कि जब चार साल के कोर्स की फीस करीब 2 लाख रुपए लेते हैं तो डिग्री भी वैधता के साथ देनी चाहिए।