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कोरोना से बचने को स्वच्छता जरूरी, माता शीतला का भी बीमारी से बचाने यही संदेश

एक वर्ष पहले
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माता के हाथ में झाड़ू घर-आसपास सफाई रखने और कलश में रोगाणु नाशक जल स्वस्थ रहने का प्रतीक

कागा में शीतला माता का मेला रविवार शाम साढ़े चार बजे ध्वजारोहण के साथ शुरू होगा। यह मेला स्वच्छता का भी संदेश देता है। इन दिनों चल रहे कोरोना वायरस से बचने के लिए भी स्वच्छता जरूरी है। सोमवार को अष्टमी पर मेला भरेगा और भक्तों के आने का सिलसिला शुरू होगा। मेले में भीड़ भी होगी, लेकिन शीतला माता इस बीमारी से बचने का संदेश भी देती है। माताजी के एक हाथ में झाड़ू है जो घर और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई रखने का संदेश देती है। वहीं दूसरे हाथ में कलश है, जिसमें रोगाणु नाशक जल हाथ धोने का प्रतीक है यानी कोरोना से बचने के लिए जहां व्यक्ति रहता है वह साफ-सुथरा होना चाहिए और सेनेटाइजर के रूप में हर थोड़ी देर में हाथ धोना चाहिए। ऐसी मान्यता भी है कि जिस घर में भोजन की शुद्धता का ख्याल रखा जाता है, वहां पर माताजी कभी कुपित नहीं होती हैं।

जोधपुर में अष्टमी को होती है पूजा

वैसे तो देश-प्रदेश में सभी जगहों पर सप्तमी के दिन शीतला माता का पूजन होता है, लेकिन जोधपुर में यह पूजा अष्टमी के दिन होती है। दरसअल, इस दिन करीब 248 साल पूर्व विक्रम संवत 1826 में तत्कालीन महाराजा विजयसिंह के पुत्र महाराज कुमार का निधन हो गया था। तबसे जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में अकता रखने की परंपरा है, जिसका निर्वाह अभी तक किया जा रहा है।

मेले में प्लास्टिक पर रहेगा प्रतिबंध, बांटेंगे पैम्फलेट

कागा स्थित शीतला माता मंदिर में इस बार प्लास्टिक में प्रसाद या अन्य सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। शीतला माता मेला मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कागा तीर्थ में प्रसाद की दुकानों व अन्य खाने-पीने की दुकानों पर पैम्फलेट बांटकर दुकानदारों को जागरूक करेंगे। साथ ही पर्यावरण व स्वच्छता को लेकर संदेश भी दिया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल कच्छावाह व मेला अधिकारी कुलदीप गहलोत ने बताया कि मेले का प्रारंभ रविवार को जेडीए के पूर्व चेयरमैन राजेंद्रसिंह सोलंकी ध्वजारोहण के साथ करेंगे। पूर्व मंत्री व राज्यसभा सांसद पद के प्रत्याशी राजेंद्र गहलोत समारोह की अध्यक्षता करेंगे। समारोह में समाजसेवी जसवंतसिंह कच्छावाह भी बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे।

मां शीतला की गदर्भ की सवारी देती है धैर्य व परिश्रम का संदेश

शीतला माता गर्दभ की सवारी करती हैं। चूंकि यह बहुत धैर्यशाली जानवर है, इसलिए मां शीतला इसके जरिए यह संदेश देती है कि मनुष्य को अपना तन-मन शीतल रखते हुए धैर्य के साथ निरंतर परिश्रम करना चाहिए। इसी से सफलता प्राप्त होती है और जीवन सुखमय होता है।
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