कंस्ट्रक्शन ठेकेदार जमा कर रहाफसल बीमा क्लेम दावे के आवेदन
कंस्ट्रक्शन ठेकेदार को फसल खराबे के आवेदन देते किसान।
बाप | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के फार्म जमा करवाने के हालात इतने खराब हैं कि बाप के कृषि सहायक अधिकारी ने किसान भवन के पास चल रहे निर्माण कार्य के ठेकेदार को किसानों से बीमा क्लेम के फार्म जमा करने के लिए कह दिया। प्रधानमंत्री स्वयं किसानों को फसलों का बीमा करवाने के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन इसके संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी खुद इस योजना को पंगु व लचर बनाने में लगे हुए हैं। ज्ञात रहे कि इन सबके बीच कृषि आयुक्त ओमप्रकाश सोमवार को जोधपुर जिले में 5 मार्च को हुई बारिश से हुए खराबे का अवलोकन करने के लिए आ रहे हैं।
रविवार को चार दर्जन से अधिक किसान यहां बाप के किसान भवन पहुंचे, लेकिन वह बंद था। किसानों ने बाप क्षेत्र के बीमा क्लेम का कार्य देख रहे कृषि सहायक अधिकारी राकेश कुमार से दूरभाष पर बात कर दावा आवेदन करने की बात कही तो पहले उन्होंने यह कह दिया कि सभी आवेदन दरवाजे के नीचे से अंदर खिसका दो। किसानों ने कहा कि यह क्या मजाक है। कार्यालय कभी-कभार खुलता है। यदि बाद में ये कागजात नहीं मिले तो उसकी जवाबदारी किसकी होगी। किसानों द्वारा रोष जताने पर सहायक अधिकारी ने किसानों को किसान भवन के आगे चल रहे कंस्ट्रक्शन कार्य के ठेकेदार को ही फाॅर्म देने की बात कह दी। श्रवण खीचड़ ने बताया कि पहले उन्होंने सभी 40 दावों के आवेदन ठेकेदार को दे दिए, लेकिन कुछ देर बाद वे ठेकेदार से वापस ले आए। किसानों ने रोष जताते हुए कहा कि हमारी पीड़ा से किसी अधिकारी-कर्मचारी को सरोकार ही नहीं है। कंस्ट्रक्शन ठेकेदार ने यह भी बताया कि शुक्रवार को भी 3 दर्जन के करीब किसान उसे आवेदन देकर गए हैं। कृषि अधिकारी ने ही उसे फोन कर आवेदन लेने को कहा है। वह आएंगे तो वह उन्हें दे देगा। ऐसे में बाप में कृषि विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब जिम्मेदार स्वयं इसको लेकर गंभीर नहीं हैं तो गैर सकारी व्यक्ति पर किसान किसका भरोसा करें?
किसानों ने बताया कि बीमा का दावा करने के लिए केवल 7 दिन दिए गए हैं, लेकिन इसके लिए आवेदन किसके पास जमा करवाएं। क्लेम के लिए कृषि बीमा कंपनी का नंबर लगता नहीं और ऑफलाइन दावे के लिए कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी किसानों को मिलते नहीं।
इस मामले में जब कृषि विभाग के उप निदेशक वीरेंद्रसिंह सोलंकी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि स्थानिक आपदाओं से फसल नष्ट होने की स्थिति जैसे ओलावृष्टि, भू स्खलन, बादल फटना प्राकृतिक आग एंव जलप्लावन की स्थानिक आपदाओं से अधिसूचित फसल की क्षति की स्थिति में फसल के नुकसान का आंकलन व्यक्तिगत बीमित फसली कृषक के स्तर पर किए जाने का प्रावधान है। इन आपदाओं की स्थिति में भी बीमित फसली कृषकों को आपदा के 72 घंटे के अंदर सीधे बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर तथा लिखित में 7 दिवस में अपने बैंक बीमा एजेंट के माध्यम से अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों के माध्यम से बीमा कंपनी को सूचित करना आवश्यक है।
बाप में सभी पद रिक्त हैं। मैं केवल एक मात्र पूरे बाप को देख रहा हूं। इसके अलावा उन्हें विभागीय कार्य के लिए जोधपुर भी जाना पड़ता है। आज बाहर होने की वजह से कंस्ट्रक्शन ठेकेदार को आवेदन लेने को कहा था ताकि किसान परेशान नहीं हो। मैं बाप जाऊंगा तो उनसे ले लूंगा।
राकेश कुमार, कृषि सहायक अधिकारी