जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में निर्णय : वास्तविक बकाया राशि पर ही होगी ब्याज की गणना
जीएसटी लागू होने के बाद से लेकर अब तक व्यवहारियों की कई परेशानियों का समाधान धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन एक सबसे अहम समस्या थी जीएसटी रिटर्न भरने में देरी के बाद बकाया टैक्स राशि पर ब्याज की गणना का। कारोबारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स से जुड़े इस मुद्दे को सबसे पहले दैनिक भास्कर ने गत 6 मई 2019 को ‘कारोबारियों पर सालाना रिटर्न भरने का दबाव, ब्याज की गणना को लेकर 4 महीने से असमंजस बरकरार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर उजागर किया था। व्यापारी और स्टेट व सेंट्रल जीएसटी के स्थानीय अधिकारी भी असमंजस में थे कि ब्याज की गणना ग्रॉस वेल्यू पर करे या नेट वेल्यू पर। चूंकि, नए सिस्टम में कई कारोबारी समय पर टैक्स की राशि जमा नहीं करवा पाए थे। ऐसे में उन्हें बकाया रही राशि पर सरकार को ब्याज देना था और वे इसके लिए तैयार भी थे, लेकिन इसमें कारोबारियों का कहना था कि उनकी जितनी टैक्स राशि बकाया है, उसमें से सरकार के पास पहले से जमा पड़ी राशि का समायोजन तो होना चाहिए, लेकिन पोर्टल पर ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। स्थानीय अधिकारी भी पूरी बकाया राशि पर ब्याज की गणना करने की बात कहते रहे। ग्रॉस वेल्यू पर ब्याज की गणना वास्तविक बकाया पर ब्याज की तुलना में कई गुना अधिक हो रही थी। जीएसटी एक्सपर्ट सीए डॉ. अर्पित हल्दिया ने बताया कि इस मुद्दे पर टैक्स प्रोफेशनल्स ने व्यक्तिगत व संगठनों के माध्यम से भी जीएसटी काउंसिल सहित अन्य को प्रतिवेदन भेजे थे। शनिवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस समस्या का समाधान कर दिया गया। जीएसटी काउंसिल ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट कर दिया कि देरी से किए गए भुगतान पर ब्याज की गणना वास्तविक बकाया राशि यानि नेट वेल्यू पर की जाएगी। यह आदेश 1 जुलाई 2017 से प्रभावी होगा। इसके लिए जीएसटी कानून में भी संशोधन किया जाएगा।
6 मई 2019