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सदस्यता शुल्क एक लाख करने पर जनरल हाउस में चर्चा आज, दूसरे दिन भी 1550 फॉर्म, पौने 4 करोड़ रुपए जमा

एक वर्ष पहले
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बार काउंसिल ऑफ राजस्थान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के विपरीत राज्य सरकार द्वारा अधिवक्ता कल्याण कोष के आजीवन सदस्यता शुल्क को बढ़ाकर 1 लाख रुपए करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन शाहिद हसन ने शनिवार को काउंसिल के जनरल हाउस की आवश्यक बैठक बुलाई है, जिसमें काउंसिल के प्रस्ताव के विपरीत विधानसभा द्वारा शुल्क बढ़ाने के संबंध में चर्चा की जाएगी। वहीं शुक्रवार को भी बढ़े हुए शुल्क का नोटिफिकेशन जारी नहीं होने पर पुराने शुल्क से सदस्य बनने के लिए वकील आवेदन जमा कराने के लिए उमड़ पड़े। दूसरे दिन भी 1550 फॉर्म जमा हुए और शुल्क पेटे करीब पौने चार करोड़ रुपए बार काउंसिल को मिले। बार काउंसिल कर्मचारी भी देर रात तक रुककर औपचारिकता पूरी करने में जुटे रहे। काउंसिल ने वकीलों की संख्या को देखते हुए काउंटर की संख्या चार से बढ़ाकर पांच कर दी है। शनिवार को भी वकीलों के आवेदन जमा होंगे।

बार काउंिसल ऑफ राजस्थान अधिवक्ता कल्याण कोष की आजीवन सदस्यता शुल्क 17 हजार 900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपए व वेलफेयर टिकट 25 से बढ़ाकर 50 रुपए करने का प्रस्ताव भेजा गया था। राज्य सरकार ने इसके विपरीत आजीवन सदस्यता शुल्क बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया और विधानसभा से प्रस्ताव पारित करा दिया। इसी तरह वेलफेयर टिकट भी 25 की बजाय 100 व 200 रुपए कर दिया। वकील आजीवन शुल्क व वेलफेयर टिकट में भारी बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं। कई वकीलों ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष कपिल बोहरा ने कहा कि मौजूदा शुल्क से पांच गुना से भी ज्यादा शुल्क बढ़ाया गया है, जो नए वकीलों पर भारी बोझ है।

वकीलों के बढ़ते विरोध को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के जनरल हाउस की शनिवार को आवश्यक बैठक बुलाई है, ताकि इस संबंध में कोई हल निकाला जा सके। मीटिंग सुबह 11 बजे बार काउंसिल के कार्यालय में चेयरमैन शाहिद हसन की अध्यक्षता में होगी। मीटिंग में बार काउंसिल के प्रस्ताव के विपरीत वेलफेयर फंड की आजीवन सदस्यता शुल्क व वेलफेयर टिकट में बढ़ोतरी पर चर्चा की जाएगी और इस संबंध में निर्णय किया जाएगा। चेयरमैन हसन ने बताया कि गवर्नर को ज्ञापन भी दिया गया है व वेलफेयर फंड के आजीवन सदस्यता शुल्क व वेलफेयर टिकट में बढ़ोतरी के संशोधित अधिनियम को नोटिफाई नहीं करें।

पुराने शुल्क से सदस्य बनने के लिए वकील उमड़े।
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