पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पानी बचाने के तरीके पर बनी डाॅक्यूमेंट्री 6 एशियाई भाषाआें में होगी टेलीकास्ट

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

Conservation

मारवाड़ के लाेगाें ने सैकड़ाें बरसाें पहले ही बारिश के पानी काे सहेजने के लिए सदियों पहले कुए-बावड़ियां अाैर झालरे बनाने की तकनीक अपना ली थी। यही नहीं, समय के साथ ये अाज भी राेजमर्रा के जीवन में अपनी उपयोगी भूमिका निभा रहे हैं। अब जब विभिन्न प्राकृतिक कारणों से धरती पर पानी की कमी होती जा रही है तो कई देशों के लोग पानी बचाने के इन तरीकों को अपनाने लगे हैं। हाल ही में जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय प्रसारक चैनल की ओर से मारवाड़ के जल स्त्रोत संरक्षण और बावड़ियों-झालरों को लेकर किए गए कार्यों पर एक डाक्यूमेंट्री बनाई है। यह छह एशियाई भाषाओं में तैयार होगी और पूरे एशिया में टेलिकास्ट की जाएगी। इस सीरिज को शूट करने के लिए इस चैनल के हिंदी एडिटर अशोक कुमार जोधपुर आए थे। अशोक कुमार के साथ जोधपुर के प्रत्युष जोशी ने तीन दिन में चार वीडियो फिल्में शूट की। प्रत्युष ने बताया, हमने महिलाबाग झालरे की सफाई करने वाले विदेशी नागरिक केरॉन से बात की। उनके जीवन और जोधपुर से जुड़ाव के साथ उनकी कार्यशैली का भी इस डाॅक्यूमेंट्री में जिक्र किया गया है। इस डाक्यूमेंट्री में मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के डायरेक्टर करणी सिंह जसोल ने जल संरक्षण और ऐतिहासिक जल स्त्रोत संरक्षण पर किये कार्यों के बारे में बताया है। प्रत्युष ने बताया, फिल्म आने वाले सप्ताह में दूरदर्शन पर \\\"मंथन\\\' कार्यक्रम में हिंदी में प्रसारित होगी ताकि भारत के हर गांव कस्बे और जिले तक इसको देखा जा सके। साथ ही 6 एशियाई भाषाओं में भी इसकी डबिंग होगी जिससे सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें। प्रत्युष के अनुसार, केराॅन पिछले 5 साल से जाेधपुर में बावड़ियाें की सफाई कर रहे हैं। केराॅन की ओर से बावड़ियों की सफाई के शुरुआती वीडियो को कुछ महीने पहले फ्रांस के ब्रूट इंडिया में सबसे ज्यादा देखा गया। जिसे 4 लाख 27 हजार व्यू मिले। जोधपुर जल स्त्रोत पर बना यह पहला शार्ट वीडियो है जो अभी तक सर्वाधिक देखा गया है। इसके बाद अब डीडब्ल्यू ग्रुप का होगा।

प्रत्युष शहर के डेवलपमेंट में काेताही की शिकायतें संपर्क पोर्टल के जरिए दूर करवाकर अपनी पहचान बना चुके हैं। प्रत्युष ने बताया, मेरा मुख्य उद्देश्य जोधपुर में बढ़ रहे पर्यटकों को इन जलस्त्रोत की तरफ डायवर्ट करना भी है। साथ ही इन पर इंटरनेट पर मटीरियल बढ़े ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इनके बारे में जान सके और मेहरानगढ़, उम्मेद भवन, मण्डोर के बाद लोग इन प्राचीन जलस्रोतों को देखने-समझने के लिए एक पूरा दिन दें। इससे जोधपुर में राेजगार भी बढ़ेगा और ये जलस्त्रोत वापस जीवित होंगे।

साइंस और नेचर पर ही फोकस है चैनल

प्रत्युष ने बताया, जर्मनी का चैनल डीडब्ल्यू साइंस और नेचर पर ही फोकस करता है और वे ऑरिजनलिटी दिखाने में विश्वास करते हैं। यह कवर करने आए अशोक कुमार को जब पता चला कि राजस्थान में अनार की खेती हो रही है तो वे जेलूगगाड़ी के खेतों में पहुंच गए और इस स्टोरी को भी कवर किया। जेलू गगाड़ी में अनार के खेत में शूट हुए इस वीडियो में किसान नेमीचंद पालीवाल ने इस सूक्ष्म क्षेत्र में अनार की खेती के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे बताया। तीसरा वीडियो मेहरानगढ़ के म्यूजियम और लाइब्रेरी के दस्तावेज और वस्तुओं के रिस्टोरेशन संबंधी कार्य जिसमें लैब का शूट, लाइब्रेरी के डिजिटल वर्क का शूट किया गया। यहां महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश के संयोजक महेंद्र सिंह तंवर ने पूरे प्रोसेस की जानकारी दी। चौथा वीडियो नागौर रोड पर बसी गोशाला में बनाया गया जिसमें बीमार गायों के इलाज कर रहे वहां के अस्पताल की कार्यशैली पर है।

मारवाड़ में तो पानी को देवताओं के रूप में माना जाता है। राजस्थान में पानी के मूल्यों, परंपरा और संस्कृति को दिखाने के लिए पिछले दिनों चीन की टीम भी जोधपुर के रानीसर पर वीडियो शूट करके गई थी। चीन की टीम ने मेहरानगढ़ में किए गए शूट के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर पानी के महत्व और इसके मूल्यों को साझा करने का बीड़ा उठाया। महेंद्र सिंह तंवर ने बताया, इस वीडियो शूट में चीन ने राजस्थानी महिलाओं के पानी लाते समय गाए जाने वाले गीतों को भी जगह दी है। यह वीडियो वहां टेलिकास्ट हो चुका है और खूब सराहा गया था। करणीसिंह जसोल ने इसमें मारवाड़ में पानी की महत्ता के बारे में बताया तो सीमा राठौड़ ने अपनी टीम के साथ पणिहारी गीत के जरिए बावड़ी से पानी लाते हुए गीत गाने के शॉट फिल्माए गए थे।

चीन की टीम ने भी जल संरक्षण पर किया था वीडियो शूट
खबरें और भी हैं...