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खून का थक्का बनने की फैमिली हिस्ट्री, मरीज का मोटापा और सास का डोनर होना रहे किडनी रिजेक्ट के कारण

Jodhpur News - मथुरादास माथुर अस्पताल में गुरुवार को हुए किडनी ट्रांसप्लांट में मरीज मुकेश की टांग बचाने के लिए जयपुर एसएमएस...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:05 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news family history of becoming a blood clot patient obesity and mother in law donor being due to kidney reject
मथुरादास माथुर अस्पताल में गुरुवार को हुए किडनी ट्रांसप्लांट में मरीज मुकेश की टांग बचाने के लिए जयपुर एसएमएस अस्पताल में ऑपरेशन किया गया। जयपुर से लौटे यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप शर्मा ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की मेन ऑर्टरी में खून का थक्का जम गया था, जिसे यहां निकाला जाना संभव नहीं था क्योंकि हमारे पास केवल एक कार्डियोथोरेसिक सर्जन है जबकि ऐसे समय में पूरी टीम की आवश्यकता होती है। ऐसे में मरीज को वहां लेकर गए। डॉ. शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन से पहले और दौरान परिवारजनों को हाई रिस्क होना बताकर तीन बार सहमति ली गई थी। मरीज की फैमिली में थॉम्बोसिस (खून का थक्का या क्लॉट बनना) की हिस्ट्री रही है। मरीज की मां का पैर भी थॉम्बोसिस होने के कारण काटना पड़ा। उसके अलावा मरीज का माेटा होना भी दिक्कत थी। साथ ही सास द्वारा किडनी देना भी रिजेक्ट का एक कारण रहा। डॉ. शर्मा ने बताया कि जिस केस में ब्लड रिलेटिव किडनी नहीं दे पाते हैं, उन केस में रिजेक्ट रेट अधिक होती है। उन्होंने बताया कि मरीज को जयपुर में शिफ्ट करने के बाद उसका थॉम्बोसिस का ऑपरेशन किया। खून के क्लॉट को हटाने के बाद जब किडनी में खून की सप्लाई देखी तो वह रिजेक्ट हो चुकी थी। खून का क्लॉट सामान्य सर्जरी में भी होता है। किडनी की सर्जरी में क्लॉट बनने का प्रतिशत 10 गुना अधिक होता है।

मुकेश

ट्रांसप्लांट मरीज को जयपुर छोड़कर आई एंबुलेंस का तेल खत्म, एनेस्थिसिया के डॉक्टर टैक्सी करके पहुंचे

गुरुवार देर रात करीब 3 बजे मथुरादास माथुर अस्पताल से मरीज को लेकर गई अत्याधुनिक एंबुलेंस का जयपुर से आते वक्त तेल खत्म हो गया। इसके कारण एंबुलेंस में आए एनेस्थिसिया के दो डॉक्टरों को टैक्सी लेकर अपने घर जाना पड़ा। एंबुलेंस ड्राइवर ओमाराम ने बताया कि रात को यहां से जाते समय अस्पताल प्रशासन से पैसे मांगे तो उन्होंने नहीं दिए। उन्होंने कहा कि डॉ. प्रदीप से ले लेना, वापस आकर मैं दे दूंगा। जयपुर पहुंचकर मरीज को शिफ्ट करने के बाद डॉ. प्रदीप से पैसे मांगे तो उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद देता हूं। ऑपरेशन लेट तक चलता तो हम दिन में डेढ़-दो बजे वहां से निकल गए। शिकारगढ़ आकर तेल खत्म हो गया, जिस पर एनेस्थिसिया के दो डॉक्टर टैक्सी लेकर निकल गए।

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