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पहले सामान्य मरीज ने भर्ती होने से इनकार किया फिर डाॅ. लाखोटिया भर्ती होने के बजाय घर चले गए

एक वर्ष पहले
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एमडीएम अस्पताल में गुरुवार सुबह एक अाैर स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मरीज पहुंचा, लेकिन वह भी स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती होने के बजाय सैंपल देकर घर चला गया। ये संदिग्ध कोई और नहीं बल्कि डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के ही पूर्व मेडिसिन विभागाध्यक्ष अाैर काेराेना वायरस के संदिग्धों की जांच अाैर जागरूकता के लिए बनी रेपिड रेस्पॉन्स टीम के सदस्य डॉ. मनोज लाखोटिया हैं। गौरतलब है कि बुधवार काे एक मरीज स्वाइन फ्लू पॉजिटिव अाया था, लेकिन परिजन स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती करने के बजाय घर लेकर चले गए थे। उनका कहना था कि वार्ड हाइजेनिक नहीं है, हम घर पर ज्यादा ध्यान रख लेंगे। हालांकि देर शाम डाॅ. लाखाेटिया की रिपोर्ट नेगेटिव अाई, अगर रिपोर्ट पॉजिटिव अाती ताे उनका घर जाना उनके परिवार के लिए खतरा बन सकता था, क्योंकि डॉ. लाखोटिया डायबिटीज और हार्ट के मरीज हैं। उनके तीन से चार स्टेंट लग चुके हैं। ऐसे मरीजों की इम्युनिटी कम होती है। एेसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरीज स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती होने से डर क्यों रहे हैं? क्या हमारा वार्ड सच में एेसा नहीं है कि यहां भर्ती मरीज ठीक हाे सके? काेराेना वार्ड में दाेनाें मरीज भर्ती हुए, लेकिन स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती करने का कहते ही दाेनाें घर क्यों चले गए?

संदिग्धाें की जांच के लिए जैसलमेर गए थे

डॉ. लाखोटिया एसीएस रोहित कुमार सिंह के आदेश पर बनाई रेपिड रेस्पॉन्स टीम के सदस्य के ताैर पर पिछले सप्ताह दो बार कोरोना वायरस के संदिग्धों की जांच और जागरूकता के लिए जैसलमेर विजिट करने गए थे। इसके बाद से उनकी तबीयत खराब थी। तबीयत ज्यादा खराब होने के चलते गुरुवार सुबह एमडीएमएच में कोरोना वायरस के लिए बने आइसोलेशन वार्ड में पहुंचे। वहां उन्हें भर्ती किया गया, लेकिन बाद में वर्तमान विभागाध्यक्ष डाॅ. श्याम माथुर ने उन्हें चैक कर स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती होने के लिए अाैर सैंपल देने के लिए कहा। इस पर उन्होंने वहीं स्वाब का सैंपल दिया, लेकिन भर्ती नहीं हुए। गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू के इस साल अब तक 10 ही मरीज आए हैं।

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