गणगौर आज, महिलाएं घरों में ही मिट्‌टी के ईसर और गवर बनाकर पूजा करेंगी

Jodhpur News - महिलाएं शुक्रवार को गणगौर मनाएंगी। इस बार कोरोना वायरस की महामारी से शहर में लॉकडाउन के चलते भीड़ नहीं जुटेगी,...

Mar 27, 2020, 08:11 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news gangaur today women will worship in their homes by making earthen and marble

महिलाएं शुक्रवार को गणगौर मनाएंगी। इस बार कोरोना वायरस की महामारी से शहर में लॉकडाउन के चलते भीड़ नहीं जुटेगी, घरों में ही ईसर-गणगौर प्रतिमाओं की पूजा कर परंपरा निभाई जाएगी। गणगौर पूजन नवरात्रि के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से आरंभ होता है। इसमें कन्याएं और विवाहित स्त्रियां मिट्टी के शिव यानी गण (ईसर) व माता पार्वती यानी गौर (गवर) बनाकर पूजन करती हैं। इसमें महिलाएं 16 दिन तक पूजन करती हैं। महिलाएं घर पर पूजन करेंगी। इसमें एकसाथ दूब लाकर रोजाना उससे दूध के छींटे मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देकर पूजन कर सकती हैं।

गणगौर तीज कथा }पौराणिक कथानुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन एक बार भगवान शिव शंकर और माता पार्वती भ्रमण के लिए धरती पर आए, उनके साथ देवर्षि नारद मुनि भी थे। धरती पर चलते-चलते एक गांव में पहुंच गए। उनके आने की खबर सुनकर सभी गांववासी उनकी आवभगत करने की तैयारियां करने लगे। एक ओर कुलीन घरों से स्वादिष्ट भोजन पकने की खुशबू आने लगी, लेकिन कुलीन स्त्रियां स्वादिष्ट भोजन लेकर पहुंचती उससे पहले ही गरीब परिवारों की महिलाएं अपने श्रद्धासुमन लेकर भगवान के पास पहुंच गईं। माता पार्वती ने उनकी श्रद्धा व भक्ति को देखते हुए सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। जब कुलीन घरों की स्त्रियां तरह-तरह के मिष्ठान, पकवान लेकर पहुंचीं तो माता के पास उन्हें देने के लिए कुछ नहीं बचा, ऐसा देख भगवान शंकर ने पार्वती से कहा- अपना सारा आशीर्वाद तो उन गरीब स्त्रियों को दे दिया अब इन्हें आप क्या देंगी? माता ने कहा कि इनमें से जो भी सच्ची श्रद्धा लेकर यहां आई हैं, उस पर ही इस विशेष सुहागरस के छींटे पड़ेंगे और वह सौभाग्यशालिनी होगी। तब माता पार्वती ने अपने रक्त के छींटे बिखेरे जो उचित पात्र स्त्रियों पर पड़े और वे धन्य हो गईं। लेकिन लोभ-लालच और अपने ऐश्वर्य का प्रदर्शन करने पहुंची महिलाओं को निराश लौटना पड़ा।

20 साल में पहली बार ऐसा हुआ: पति लेकर आए गवर के लिए पानी

पावटा निवासी अनिशा राजकमल सोनी ने बताया कि 20 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि हम लोगों ने ना लोटियां निकाली और ना ही बाहर जा पाए। बीज के दिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं लोटियां उठाकर सरोवर जाती हैं और वहां से गणगौर-ईसर के पानी लाती हैं जो तीज के दिन पिलाया जाता है। इस बार लॉकडाउन के चलते ये प्रथा नहीं हो पाई तो घर से पति सरोवर गए और ईसर-गणगौर के लिए घड़ा भरकर लाए। जबकि पति पानी लेने साथ नहीं जाते हैं।

कन्याएं करती हैं अच्छे वर की कामना

गणगौर पर्व हर स्त्री द्वारा मनाया जाता है। इसमें कुंवारी कन्या से लेकर विवाहित स्त्री भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन करती हैं। ऐसी मान्यता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता है। इस पूजन का महत्व अविवाहित कन्या के लिए अच्छे वर की कामना को लेकर रहता है जबकि विवाहित स्त्री अपने पति की दीर्घायु के लिए पूजन करती हैं। इसमें अविवाहित कन्या पूरी तरह से तैयार होकर और विवाहित स्त्री सोलह श्रंगार करके पूरे सोलह दिन पूजन करती हैं।


गणगौर तीज सौभाग्य सुंदरी व्रत पूजा विधि

गणगौर तीज व्रत चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुबह सूर्योदय से पूर्व ही स्नान कर लें। इस दिन माता पार्वती की पूजा गणगौर माता के रूप में की जाती है एवं पूर्व में लगाए गए ज्वारे की ईसर यानी शिव रूप में पूजा की जाती है। व्रती महिलाएं माता गणगौर को सुहाग की सभी सामग्रियां अखंड सौभाग्य की कामना से भेंट करें। पूजा में माता को सिंदूर अर्पित करें एवं उसी सिंदूर से हर दिन अपनी मांग भरें। अविवाहित कन्याएं भी गणगौर तीज का व्रत रखकर गौरी माता से अच्छे जीवनसाथी की कामना पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इस व्रत में महिलाएं अपने पति को बिना बताए ही व्रत रखती हैं।

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