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दोषी बोले- पहला अपराध था, माफ करें; सरकार बोली- मां-बाप का हत्यारा अनाथ होने की बात न करे

Jodhpur News - फांसी की सजा को कानूनी दांव-पेंच में उलझाने पर सुप्रीम काेर्ट ने गुरुवार काे सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस एसए...

Jan 24, 2020, 07:00 AM IST
Bap News - rajasthan news guilty said the first offense was sorry the government said do not talk about being the fatherless killer of parents
फांसी की सजा को कानूनी दांव-पेंच में उलझाने पर सुप्रीम काेर्ट ने गुरुवार काे सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस एसए बाेबडे ने कहा कि मृत्युदंड के खिलाफ अपीलों का एक छाेर पर अंत जरूरी है। दाेषी काे कभी नहीं लगना चाहिए कि इसका सिरा खुला रहेगा और सजा काे चुनाैती देने की लड़ाई अंतहीन चलती रहेगी। फांसी टालने के लिए निर्भया के दोषियों द्वारा कानूनी हथकंडे आजमाने के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बेहद अहम है। यूपी के अमराेहा में 10 माह के बच्चे सहित 7 लोगों की हत्या करने वाले प्रेमी जाेड़े की मृत्युदंड के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि काेर्ट कानून के अनुसार काम करेगा। पीड़िताें काे न्याय देना जजाें का कर्तव्य है। काेर्ट काे दोषियों ही नहीं, पीड़िताें के अधिकार भी देखने चाहिए। निर्भया के गुनहगाराें की अाेर इशारा कर कोर्ट ने कहा, ‘फैसले का सम्मान कर सजा स्वीकार करनी चाहिए। शेष | पेज 14



फांसी काे अंतहीन मुकदमों में फंसाने की इजाजत नहीं दे सकते।’ सभी पक्षाें की दलीलें सुनकर काेर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

उल्लेखनीय है कि डबल एमए कर चुकी शबनम संपन्न परिवार से थी, जबकि उसका पांचवीं पास प्रेमी सलीम दिहाड़ी मजदूर था। परिवार ने रिश्ता मंजूर नहीं किया ताे दाेनाें ने मिलकर 15 अप्रैल, 2008 को शबनम के परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी। इनमें एक 10 माह का बच्चा भी था। ट्रायल काेर्ट ने 2010 में दाेनाें काे माैत की सजा सुनाई थी। सुप्रीम काेर्ट ने इसे बरकरार रखा। दाेनाें ने पुनर्विचार याचिका दायर किए बिना तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के समक्ष दया याचिका लगाई थी, जो खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्हाेंने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। गृह मंत्रालय ने भी बुधवार काे ही सुप्रीम काेर्ट से दया याचिकाअाें काे लेकर 2014 में जारी गाइडलाइंस में संशाेधन की मांग की थी।

निर्भया केस: डेथ वारंट जारी करने वाले जज का तबादला

उधर, िनर्भया के दाेषियाें का डेथ वारंट जारी करने वाले सेशन जज एसके अराेड़ा डेपुटेशन पर सुप्रीम काेर्ट रजिस्ट्री में भेजे गए हैं। निर्भया के माता-पिता की याचिका वही सुन रहे थे। अब नए जज यह केस सुनेंगे।

डेथ वारंट पर अमल में 8 दिन बचे, पर आखिरी मुलाकात के लिए नाम और वक्त नहीं बता रहे चारों गुनहगार

निर्भया के चारों गुनहगारों को फांसी के लिए 1 फरवरी सुबह 6 बजे का वक्त तय है। लेकिन एक के बाद एक कानूनी हथकंडे चल रहे चारों गुनहगार मान रहे हैं कि उस दिन भी फांसी नहीं हाेगी। चारों में से किसी ने भी ितहाड़ जेल प्रशासन को यह नहीं बताया है कि फांसी से पहले वह किस परिजन से और कब मिलना चाहते हैं। न ही यह बताया है कि वह कोई वसीयत करना चाहते हैं या नहीं। डीजी जेल संदीप गोयल ने बताया िक पत्र सौंपने के एक सप्ताह बाद भी दोषियों ने कोई जवाब नहीं दिया है।

जेल की कोठरी से एक-डेढ़ घंटे ही निकल पाते हैं दोषी

निर्भया के चारों गुनहगार जेल नंबर 3 के हाई सिक्योरिटी सेल की अलग-अलग कोठरियों में हैं। दूसरे कैदियों से तो दूर ये लोग आपस में भी नहीं मिल पाते। दिन में एक-डेढ़ घंटे के लिए ही इन्हें कोठरियों से निकाला जाता है। चारों एक साथ नहीं िनकाले जाते।

कानूनी हथकंडों से फांसी की सजा टालने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

फांसी के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी : चीफ जस्टिस

हर अपराधी के अंदर एक मासूम दिल ही बताया जाता है। लेकिन, हमें अपराध काे भी देखना हाेता है। हम सिर्फ दाेषियाें के जीवन अाैर मृत्युदंड पर ही जाेर नहीं देना चाहते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सजा अपराध के अनुपात में ही हाेनी चाहिए। - एसए बोबडे, सीजेआई




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