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चालक का लाइसेंस फर्जी होने पर क्लेम नहीं रोक सकती इंश्योरेंस कंपनी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए भुगतान के आदेश

एक वर्ष पहले
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लीगल रिपोर्टर. जोधपुर| सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी को मृतक परिवार को क्लेम का भुगतान मय ब्याज के साथ करने के आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि चालक का लाइसेंस फर्जी होने के कारण से क्लेम को रोका नहीं जा सकता है।

मामले के अनुसार 10 साल पहले ब्यावर निवासी विनोद कोठारी पाली से ब्यावर आ रहे थे, जाडन के समीप उनकी कार को ट्रक चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में उनकी मौत हो गई। मृतक परिवार को यूनाइटेड कंपनी ने यह कहते हुए बीमा का भुगतान करने से इनकार कर दिया कि उनके चालक का लाइसेंस फर्जी है। परिवार की ओर से अधिवक्ता जसमीत सिंह ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष अपील की, लेकिन आयोग ने भी बीमा कंपनी के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सभी पक्ष सुनने के बाद जस्टिस नवीन सिन्हा व कृष्ण मुरारी की बेंच ने अपील स्वीकार कर कहा कि चालक का लाइसेंस फर्जी होने के कारण बीमा कंपनी बीमे का भुगतान नहीं रोक सकती है। चालक का लाइसेंस फर्जी है तो यह संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
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