एमडीएमएच की जगह एमजीएच काे बना दें काेराेना अस्पताल ताे सुधर सकती हैं हमारी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

Jodhpur News - ...क्योंकि, कोरोना के कारण संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमडीएम व प्रदेश के एकमात्र एम्स में सिर्फ इमरजेंसी सुविधा ही...

Apr 07, 2020, 08:26 AM IST
...क्योंकि, कोरोना के कारण संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमडीएम व प्रदेश के एकमात्र एम्स में सिर्फ इमरजेंसी सुविधा ही मिल रही, दाेनाें अस्पतालों में राेजाना रहने वाली करीब 7,000 मरीजों की अाेपीडी बंद, जबकि एमजीएच में अलग-अलग दिन मिलती है सुपरस्पेशिएलिटी सुविधाएं, यहां 650 बेड भी, इसलिए यहां एक साथ हो सकता है कोरोना रोगियों का इलाज


जोधपुर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ रहा है, उस हिसाब से जल्द ही हमारे यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ध्वस्त हो सकती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बनेगा मथुरादास माथुर अस्पताल अाैर एम्स में काेराेना संभावितों काे छाेड़कर अाेपीडी अाैर अन्य मरीजों का इलाज पूरी तरह से बंद करना। इन दोनों अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी में मरीजों काे देखा जा रहा है, जबकि गंभीर दिखते ही एमजीएच रेफर कर दिया जाता है। जिला प्रशासन का पूरा ध्यान दाे मेडिकल काॅलेज की सहायता से काेराेना से लड़ने की अाेर है। इसमें से एक मेडिकल काॅलेज एम्स का पूरा फोकस जोधपुर जिले अाैर आसपास के काेराेना मरीजों की जगह ईरान से आए भारतीय मरीजों पर हाे गया है। अब तक 31 ईरानी भारतीय पॉजिटिव अा चुके हैं अाैर इनके पॉजिटिव अाने का सिलसिला थम ही नहीं रहा है। ईरान से अाए 1036 भारतीयों के इलाज की जिम्मेदारी भी जोधपुर पर ही हैं। एमडीएमएच में अभी 17 पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 14 जोधपुर के, एक-एक पाली व पोकरण व एक ईरानी भारतीय शामिल हैं।

दो मेडिकल कॉलेज की सुविधा से पहले प्रशासन आश्वस्त था, लेकिन अब हालात बिगड़ने की आशंका


राजस्थान में केवल जोधपुर ऐसा जिला है, जहां दो मेडिकल कॉलेज हैं। एक एम्स जो केंद्र सरकार का है और दूसरा राज्य सरकार का डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अधीन एमडीएम अस्पताल। दाेनाें अस्पतालों के पास आसपास के जिलों के काेविड-19 के मरीजों की जिम्मेदारी भी है। प्रशासन ने तैयारी इस हिसाब से की थी कि दाे मेडिकल काॅलेज हैं तो आसानी से काेविड-19 से लड़ा जा सकता है, लेकिन ईरान से आए भारतीयों के रोजाना बढ़ते पॉजिटिव के आंकड़ों से व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है, क्योंकि जोधपुर में आने वाले पाॅजिटिवाें काे दोनों अस्पतालों में रहकर आसानी से इलाज करना संभव था, लेकिन अब यह भार मेडिकल काॅलेज पर पड़ रहा है। वह इसलिए भी क्योंकि यदि एक मरीज कोरोना का पॉजिटिव आता है तो गाइडलाइन के हिसाब से करीब 14 दिन उसको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती रहना होता है। यदि 14 दिन बाद भी सैंपल फिर से पॉजिटिव आता है तो उसे और 14 दिन के लिए रखा जाता है।

कैंसर, कार्डियक, न्यूरो के लिए जरूरी एमडीएमएच
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भास्कर एक्सपर्ट **

डाॅ. नगेंद्र शर्मा, कोरोना वायरस एडवाइजरी चिकित्सक बोर्ड के सदस्य

हमने भी प्रशासन काे सुझाव दिया है कि एमजीएच को कोरोना अस्पताल बनाना चाहिए और एमडीएमएच में आमजन के लिए ओपीडी शुरू करनी चाहिए, क्योंकि यहां मरीजों का लोड अधिक है। मरीजों काे अभी पूरे जिले में कहीं भी सुपरस्पेशिएलिटी की सेवाएं जैसे कैंसर, कार्डियक, न्यूरो, डायलिसिस जैसी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इनको सही करने के लिए एमजीएच को कोरोना अस्पताल बनाना सभी के लिए उचित होगा।

जबकि सामान्य दिनों में केवल इमरजेंसी में 400 से अधिक मरीज आते हैं और 1 दिन की ओपीडी 3000-3500 मरीजों की होती थी।


तारीख अाेपीडी अाईपीडी

1 अप्रैल 398 100 से कम

2 अप्रैल 384 92

एमडीएमएच में ऐसे गिरी ओपीडी**

एमडीएमएच की इमरजेंसी की ओपीडी में किसी भी विभाग के बड़े डॉक्टर नहीं होते हैं, जबकि अब ओपीडी भी बंद है। एेसे में रेजिडेंट्स के भरोसे काम चल रहा है। मरीज काे निजी अस्पताल या एमजीएच में जाना पड़ रहा है, वहां भी केवल मेडिसिन सर्जरी और आॅर्थोपेडिक के डॉक्टर मिलते हैं।


अभी क्या स्थिति } एमडीएम में इलाज नहीं, भटक रहे गंभीर मरीज**

दूसरा फायदा }कोई स्टाफ इधर-उधर से नहीं लगाना पड़ता, क्योंकि पूरे अस्पताल का स्टाफ एक ही छत के नीचे एक ही तरह के इलाज के लिए काम करता। किसी अन्य को लगाने की जरूरत नहीं होती। यदि कुछ मेडिसिन और अन्य विभाग के बड़े डॉक्टर की जरूरत होती तो वे एमडीएमएच से एमजीएच में आ जाते।
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तीसरा फायदा }पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल एमडीएमएच की ओपीडी-आईपीडी बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती। हार्ट, कैंसर के मरीजों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता। वर्तमान में कोविड-19 के चलते मेडिकल कॉलेज के दोनों अस्पताल में सुपरस्पेशिएलिटी की सेवाएं बंद के बराबर हैं।
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पहला फायदा }पहले दिन से करीब 696 बेड का पूरा एक अस्पताल कोरोना मरीजों के लिए मिलता। वर्तमान में यहां केवल तीन क्लिनिकल और तीन नॉन क्लिनिकल विभाग संचालित हैं, जो एमडीएमएच में एक जगह संचालित किए जा सकते हैं। इसमें मेडिसिन आर्थोपेडिक और सर्जरी और रेडियोलॉजी, एनेस्थिसिया और फॉरेंसिक मेडिसिन है।
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चिकित्सा विभाग ने पहले एमडीएमएच में बनी सुपरस्पेशिएलिटी विंग में कोरोना वार्ड खोलने के लिए कहा, जिसमें पहले संदिग्ध आ रहे थे। फिर पॉजिटिव आने के बाद तत्कालीन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने यहीं कोरोना का पूरा इलाज करने के आदेश निकाल दिए, लेकिन किसी ने एमजीएच के लिए नहीं सोचा। यदि सोचते तो सभी के लिए फायदा था।


सुझाव } एमजीएच को कोविड-19 अस्पताल बनाने से एमडीएम में हो सकेगा हार्ट व कैंसर रोगियों का इलाज**

ईरानी भारतीयों सहित पूरे संभाग के कोरोना रोगियों की जिम्मेदारी से बढ़ा मेडिकल कॉलेज का भार

जिले के सरकारी विभाग, एम्स और मेडिकल कॉलेज सिर्फ संभाग के हिसाब से कोरोना से लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन वर्तमान में एम्स में केवल ईरानी और पूरे संभाग से आ रहे मरीजों का भार एमडीएमएच पर आ रहा है। 29 मार्च को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस रोहित कुमार सिंह ने भी आदेश जारी कर डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में जोधपुर सहित पाली, जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर और सिरोही के कोरोना पॉजीटिव मरीजों का इलाज और जांच करने के आदेश दिए हैं।

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