खेतासर : मुनिसुव्रत स्वामी मंदिर व दादावाड़ी का प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू

Jodhpur News - जैन समाज के चौथे दादा गुरुदेव जिन चंद्र सुरिश्वर महाराज के जन्मस्थल खेतासर में तीर्थंकर परमात्मा मुनिसुव्रत...

Feb 15, 2020, 09:25 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news khetasar pratishthan festival of munisuvrat swamy temple and dadwadi started

जैन समाज के चौथे दादा गुरुदेव जिन चंद्र सुरिश्वर महाराज के जन्मस्थल खेतासर में तीर्थंकर परमात्मा मुनिसुव्रत स्वामी का मंदिर व दादा गुरुदेव की दादावाड़ी बनकर तैयार है। इसका तीन दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव शुक्रवार से शुरू होगा। मुख्य समारोह 16 फरवरी को होगा, इस दौरान विधि-विधान से प्रतिष्ठा होगी। इससे पूर्व शुक्रवार को मंदिर में परमात्मा को विराजित किया गया, साथ ही विभिन्न मांगलिक कार्यक्रम व महापूजन का कार्यक्रम हुआ।

समारोह अंतर्गत शुक्रवार को वरघोड़ा निकाला जाएगा, साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महोत्सव में एकल प्रयोग प्लास्टिक की वस्तुओं के प्रयोग निषेध रहेगा।

समारोह अंतर्गत शुक्रवार को वरघोड़ा निकाला जाएगा, साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महोत्सव में एकल प्रयोग प्लास्टिक की वस्तुओं के प्रयोग निषेध रहेगा।

समारोह में निश्रा प्रदान करने के लिए आचार्य मणिप्रभ सुरिश्वर महाराज का शुक्रवार सुबह खेतासर गांव में भव्य प्रवेश हुआ। प्रवेश के बाद धर्म सभा पंडाल, राज गृही नगरी का उद्घाटन हुआ। इस मौके उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य ने प्रेम का महत्व व अर्थ समझाया। उन्होंने बताया कि परिचय के बिना प्रेम नहीं होता, अतः प्रेम से पहले परिचय होना जरूरी है। इस संसार में यदि कोई प्रेम करने के लायक है तो वह है अरिहंत परमात्मा। परमात्मा का परिचय होने के बाद उनसे प्रेम करना सार्थक होता है। हम परमात्मा से प्रार्थना करें कि वह हमारा हाथ पकड़ कर इस संसार सागर से हमें पार उतारे। समारोह में मोहनचंद ढढा, तेजराज गोलेछा, पदमचंद टाटिया, दीपचंद बाफना, तिलोकचंद पारख, रविन्द्र जैन फलोदी, बाबूलाल टाटिया, शंभूसिंह खेतासर, जवाहरलाल देश लहरा, संतोष गुलेच्छा, निर्मल मुनोयत, तेजराज गुलेच्छा, सुरेश लूणिया, संचेती परिवार खेतासर, खरतरगच्छ युवा परिषद फलोदी, बीकानेर, जोधपुर व फलोदी जैन संघ सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।

करते हुए आचार्य ने प्रेम का महत्व व अर्थ समझाया। उन्होंने बताया कि परिचय के बिना प्रेम नहीं होता, अतः प्रेम से पहले परिचय होना जरूरी है। इस संसार में यदि कोई प्रेम करने के लायक है तो वह है अरिहंत परमात्मा। परमात्मा का परिचय होने के बाद उनसे प्रेम करना सार्थक होता है। हम परमात्मा से प्रार्थना करें कि वह हमारा हाथ पकड़ कर इस संसार सागर से हमें पार उतारे। समारोह में मोहनचंद ढढा, तेजराज गोलेछा, पदमचंद टाटिया, दीपचंद बाफना, तिलोकचंद पारख, रविन्द्र जैन फलोदी, बाबूलाल टाटिया, शंभूसिंह खेतासर, जवाहरलाल देश लहरा, संतोष गुलेच्छा, निर्मल मुनोयत, तेजराज गुलेच्छा, सुरेश लूणिया, संचेती परिवार खेतासर, खरतरगच्छ युवा परिषद फलोदी, बीकानेर, जोधपुर व फलोदी जैन संघ सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।

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