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शिक्षकों के लिए आदर्श हैं महात्मा गांधी के जीवन मूल्य: बोहरा

एक वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर . जोधपुर

सांस्कृतिक संस्था संगीत किसलय संस्थान के तत्त्वावधान में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड 16 सेक्टर स्थित सुंदर मां सरस्वती मंदिर में महात्मा गांधी की 150वें जन्म वर्ष पर दांडी मार्च की वर्षगांठ मनाई। संस्थान के छात्रों ने देश भक्ति गीत व भजन प्रस्तुत कर महात्मागांधी के जीवन मूल्यों को याद किया। कार्तिक कुमावत ने राजस्थानी लोक देश भक्ति गीत \\\"हाँ रे गोरा हट जा, राज भरतपुर रो...,\\\", गिरिराज व्यास ने \\\"वैष्णव जन तो, तेने कहिये जे सुनाया। भूमिका सेवानी ने \\\"रघुपति राघव राजा राम\\\" की प्रस्तुति दी। यशवंत सिंह ने \\\"हम करें राष्ट्र आराधन\\\", हर्ष माथुर ने \\\"ऐ वतन ऐ वतन\\\" और हिमालय कुंदलानी व रवींद्र नाथ ने सैनिकों को याद करते हुए \\\"संदेसे आते हैं गीत की प्रस्तुति दी\\\" देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम में तबले पर संगत विशारद अखिल बोहरा, हारमोनियम पर संगत गिरिराज व्यास, कार्तिक कुमावत, गिटार पर संगत दीपक गोस्वामी व शिवम सिंह ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ संगीतकार व तबलावादक सतीश चंद्र बोहरा ने संबोधित करते हुए कहा कि जब महात्मा गांधी विदेश से बैरिस्टर की डिग्री ले कर, और वकालत की प्रैक्टिस कर भारत आए तब उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी। वे चाहते तो अपनी वकालत से बड़ी सम्पन्नता से जीवन व्यतीत कर सकते थे किन्तु उन्होंने आम जन और मातृभूमि की पीड़ा समझ कर भोग विलास से दूर बहुत ही कठोर जीवन व्यतीत किया और अपनी शिक्षा और ऊर्जा को देश को स्वतंत्र करवाने की दिशा में लगाया।

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