लॉकडाउन ने तो हमारी आंखें खोली हैं जो भविष्य के लिए बेहतर होगा

Jodhpur News - भारत सहित जर्मनी, इजरायल, ब्रिटेन के बच्चों ने लॉकडाउन और होम स्कूलिंग पर रखे अपने-अपने तर्क काेराेना वायरस...

Apr 04, 2020, 08:21 AM IST

भारत सहित जर्मनी, इजरायल, ब्रिटेन के बच्चों ने लॉकडाउन और होम स्कूलिंग पर रखे अपने-अपने तर्क

काेराेना वायरस के खतरे के कारण भारत सहित कई देशों में लॉकडाउन की वजह से दुनिया सुस्त हो रही है और कोविड-19 के बारे में उम्मीद खो रही है। घरों में बैठे बच्चे अपना ज्यादातर समय मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन पर सीरिज देखने में बिता रहे हैं वहीं स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने इसी स्क्रीन काे प्रोडक्टिव तरीके से उपयोग करने की पहल की। यूएन और ब्रिटिश काउंसिल के सहयोग से गुरुवार को बच्चों के लिए इंटरनेशनल ग्रुप डिस्कशन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेशन रखा गया। इसमें दो टॉपिक दिए गए थे। पहला था "देश में कोविड-19 के बाद के हालात' और दूसरा "लॉकडाउन की वजह से होम स्कूलिंग किस तरह फायदेमंद हो सकती हैं'। जर्मनी, इजरायल, ब्रिटेन और भारत की टीमों ने इसमें हिस्सा लिया। भारत की टीम में जोधपुर की मयूर चौपासनी स्कूल में 10वीं की छात्रा श्रेष्ठा माथुर भी थीं। प्रतिभागियों को अपने विचार रखने के लिए 7 मिनट दिए गए थे लेकिन श्रेष्ठा ने प्रभावी तर्क और कारणों की वजह से 30 मिनट का वक्त हासिल किया। श्रेष्ठा ने बताया, हर स्थिति के पक्ष और विपक्ष होते हैं लेकिन जब हम किसी परिस्थिति का विरोध नहीं कर सकते तो कमियों पर लाभ को देखना बेहतर होगा और इसका अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। हम यही कर रहे हैं। 31 मार्च को स्कूल की अोर से श्रेष्ठा का नाम भेजा गया था।

होम स्कूलिंग: बच्चों को जिम्मेदार बना रही, अपनी प्रेरणा खुद बन रहे

होम स्कूलिंग के दौरान बच्चे फैमिली वैल्यू और कल्चर को नजदीक से देख पा रहे हैं जो व्यस्तता और स्कूल जाने के दौरान छूट रहा था। स्कूल में जो हमें टीचर देता है उसी के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है जबकि यहां हम अपना टीचर खुद चूज कर रहे हैं। दिमाग के स्टेज और मूड को देखकर पढ़ रहे है जो ज्यादा प्रोडक्टिविटी दे रहा है। इससे पढ़ाई भी इंट्रेस्टिंग बन रही है। होम स्कूलिंग में क्यूरोसिटी बढ़ रही है और कम समय में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। स्कूल बुक्स और मटीरियल देता है पर यहां हम खुद अपने लिए चीजें जुटा रहे हैं और जिम्मेदार हो रहे हैं। वैसे स्कूल हमारा शेड्यूल तैयार कराता है वहीं यहां हम खुद अपना शेड्यूल तैयार कर रहे हैं। हमने अपने को घरों में बंद किया लेकिन दिमाग को बंद नहीं किया है इसलिए हम थॉट्स को डवलप कर सकते हैं। हम अपनी प्रेरणा खुद बने हुए हैं और इससे बेहतर भला और क्या हो सकता है। होम स्कूल से इतनी चीजें एक साथ हो रही है जबकि स्कूल जाने से सिर्फ स्कूली पढ़ाई, होम वर्क और टेस्ट ही मिल रहे थे।

लॉकडाउन : पापुलेशन का जिंदा रहना ज्यादा जरूरी, ना कि इकोनॉमी

श्रेष्ठा ने अपने तर्क देते हुए कहा, यह गोल्डन चांस मिला है जहां हम सभी अपने आप से मिल रहे हैं। यह खुद से मिलने का मौका है और इस दाैरान खुद पर बेहतर काम किया जा सकता है। किसी भी देश की पापुलेशन का जिंदा रहना ज्यादा जरूरी है, ना कि इकोनॉमी। इंसान जिंदा रहेंगे और हेल्दी होंगे तो पैसा व इकोनॉमी तो फिर दुरुस्त हो जाएगी। लॉकडाउन में पता चला कि घर की वैल्यू क्या है और यूनिटी का क्या महत्व है। शायद उस समय ज्वॉइंट फैमिली इसलिए कारगर होती थी कि सब मिलकर मुसीबत का सामना करते थे, लेकिन आज अकेला आदमी राशन लाने से लेकर फैमिली को बचाने में लगा है। लॉकडाउन ने तो हमारी आंखें खोली हैं जो भविष्य के लिए बेहतर होंगी। लॉकडाउन के बाद के चैलेंज पर माथुर ने बताया, अब जाे हिंदुस्तान खड़ा होगा वो इमोशन और इंसानियत से भरा होगा। सफाई और पर्यावरण की महत्वता को ध्यान में रखेगा जो हमने पैसा कमाने और व्यस्तता के बीच कहीं खो दी थी।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना