मकर संक्रांति दान-पुण्य का बड़ा दिन

Jan 16, 2020, 08:56 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news makar sankranti big day of charity


जाेधपुर | हम जाेधपुर वासी, दान में सबसे अागे हैं। देश में सबसे ज्यादा देहदान भी जाेधपुर ही करता है। गुपचुप रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य अाैर वस्त्रदान करने वालाें का पता तब चलता है, जब जरूरत पूरी हाे जाती है। एेसे में मकर संक्रांति पर भास्कर तीन एेसे लाेगाें की कहानी लेकर अाया, जिन्हाेंने शिक्षा, स्वास्थ्य अाैर समाज के लिए बिना साेचे, बिना समझे, एक ही पल में लाखाें रुपए दान की घाेषणा कर दी।

छात्रा ने फीस भरने की असमर्थता जताई, सबकी फीस माफ हो गई

श्याम कुंभट 26 जुलाई 2015 को एक गर्ल्स कॉलेज गए। वहां एक छात्रा उनके पास पहुंची और कहा कि उसके पिता की तबीयत ठीक नहीं है, इसीलिए वह अभी पूरी फीस नहीं भर सकती। आधी जमा करवा देगी, बाकी फीस दो महीने बाद जमा करवाएगी। वे उस बच्ची को फीस जमा करवाने के लिए लिए दो महीने का समय दिलवा दें। वहां मौजूद एमडी बिस्सा को कुंभट ने बुलाया और कहा कि इन बच्चियों से फीस क्यों ली जा रही है? यदि ये फीस भरने में असमर्थ हैं तो इनकी फीस वे भर देंगे। बिस्सा ने कहा कि कॉलेज संचालकों के अनुसार कई छात्राओं की फीस जमा हो चुकी है और कुछ की बाकी है। कुंभट ने उन्हें कहा कि पता लगाओ कि सभी बेटियों की मिलाकर कितनी फीस है। फीस की गणना के बाद पूरी राशि का चेक कॉलेज प्रशासन को दे दिया और कहा कि अब से सभी की फीस वे भरेंगे। ये सभी उनकी बेटियां हैं। जिन छात्राओं ने फीस भर दी थी कॉलेज प्रशासन ने उनकी फीस लौटा दी। कुंभट हर साल 300 से ज्यादा बेटियों की फीस जमा करवाते हैं।

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मां की प्रतिमा लगाने का कहा तो हाथोंहाथ गुरुकुल छात्रावास के लिए दे दी राशि

छह साल पहले माली संस्थान का रामबाग में गुरुकुल छात्रावास का निर्माण प्रस्तावित था। माली समाज के लोगों से सहयोग राशि ली जा रही थी। समाज एक व्यक्ति से ही यह राशि लेने का ज्यादा इच्छुक था, लेकिन ऐसा व्यक्ति तैयार नहीं हो रहा था। तब तक अफ्रीका वाले भाटी ने सर्वाधिक 25 लाख रुपए राशि दी थी। जब यह बात मंडोर के मंडावता चौराहा भियाली बेरा निवासी महेश गहलोत पुत्र देवीलाल गहलोत को पता चली तो वे पदाधिकारियों से मिले। संस्थान के पदाधिकारियों ने छात्रावास बनाने वाले के परिजनाें की प्रतिमा लगाने की बात कही तो गहलोत ने हाथों हाथ 51 लाख रुपए दे दिए। संस्थान भी उनकी मां सोनीदेवी की प्रतिमा लगाने आैर छात्रावास का नाम उनकी मां के नाम पर करने को राजी हो गई। समारोह का खर्च भी गहलाेत ने ही उठाया। सोनीदेवी देवीलाल गहलोत रिलीफ फंड सोसायटी के अध्यक्ष गहलोत ने अब छात्रावास के ग्राउंड को विकसित करने का प्रस्ताव संस्थान काे दिया है। उनकी इच्छा है कि यहां उनके पिता की भी प्रतिमा लगे। शहर की सड़काें पर बाइक पर घूमने वाले गहलोत समाजहित में कई बार एेसे ही अचानक मदद कर चुके हैं।

पिता ने बेटे को 25 लाख का हिस्सा दिया, बनवा दिया वार्ड

बात 2015 की है। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. अजय मालवीय काे पिता रामनारायण मालवीय ने बुलाया। पिता ने कहा कि वे अब वृद्ध हो गए हैं और समय का कोई भरोसा नहीं है, इसीलिए अपनी जीवन की पूंजी में से 50 लाख रुपए की राशि दोनों बेटों में बांटना चाहते हैं। पिता ने 25-25 लाख रुपए दोनों बेटों को देने की बात कही। डॉ. मालवीय ने कहा कि उनके पास माता-पिता के आशीर्वाद से कोई कमी नहीं है। उनके हिस्से की राशि से वे एमजीएच के एक वार्ड तैयार करवा दें। जब वार्ड बना ताे उसका उद्घाटन करने तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ व तत्कालीन उद्योग मंत्री गजेंद्र खींवसर आएं, लेकिन जब उन्हें इस कहानी का पता चला तो उन्हांेने वार्ड का उद्घाटन डॉ. मालवीय व उनकी प|ी डॉ. सुनीता मालवीय से करवाया। डॉ. मालवीय ने बताया कि वार्ड के उद्घाटन के कुछ माह बाद ही पिता का देहांत हो गया।

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