पल्ली से जाकर हिसार बसे, वहां ‘यादों के झरोखे’ में बसा लिया मारवाड़

Jodhpur News - मूलतः लोहावट पंचायत समिति के पल्ली गांव से जाकर हरियाणा के हिसार शहर में बसे एडवोकेट स्व मनीराम गोदारा के स्मृति...

Dec 11, 2019, 09:30 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news marwar settled in hisar after moving from palli
मूलतः लोहावट पंचायत समिति के पल्ली गांव से जाकर हरियाणा के हिसार शहर में बसे एडवोकेट स्व मनीराम गोदारा के स्मृति ग्रंथ यादों के झरोखे का लोकार्पण समारोह में फलोदी, लोहावट व जोधपुर से कई विद्वानों ने शिरकत की। पुस्तक को जाम्भाणी साहित्य अकादमी ने प्रकाशित किया है। गोदारा परिवार के लोग दशकों पहले यहां से हरियाणा जा बसे। बाबूजी के नाम से विख्यात हुए एडवोकेट मनीराम माधानी ने पुरखों की धरा से जुड़ाव जारी रखा। वे हर साल यहां आते रहे। खासकर जाम्भा में आयोजित होने वाले माधा मेले में पहुंचना नहीं भूलते थे। इसी दौरान उन्होंने जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, बाड़मेर व जालोर सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों से इस कदर सम्बन्ध बनाएं कि बरसों तक उनसे हुए पत्रव्यवहार को उन्होंने किताब के रूप में पिरो दिया। इसी का नाम दिया यादों के झरोखे से। इसके हर पन्ने पर उनके व्यक्तित्व की छाप झलक रही है। समारोह में पहुंचे व्याख्याता बुधाराम ईशरवाल जेसला ने उन्हें याद करते हुए कहा कि कुछ ही बरसों तक उनका सानिध्य रहा लेकिन इस दौरान 1100 पत्र मिले। जो उनके पास आज भी सुरक्षित है। वे बड़ी संजीदगी से सभी पत्रों का जवाब देते थे। हर पत्र में वे समाज, संस्कृति, इतिहास व जनजीवन से जुड़ी जानकारी लेते थे। उनका यह शोध समाज की नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करेगा। वे खुद इस पुस्तक को पूरा करना चाहते थे लेकिन एक दिन वे इस दुनिया से कूच कर गए। उनके इस सपने को उनके पुत्र व आईएएस पृथ्वीराज एवं एचसीएच अशोक बिश्नोई ने पूरा किया है। उनके साथ डॉ सुरेंद्र खीचड़ व केके जोहर ने संपादन किया है।

लोकार्पण समारोह में जोधपुर व बीकानेर से कई लोगों ने हिस्सा लिया।

भास्कर न्यूज | जोधपुर

मूलतः लोहावट पंचायत समिति के पल्ली गांव से जाकर हरियाणा के हिसार शहर में बसे एडवोकेट स्व मनीराम गोदारा के स्मृति ग्रंथ यादों के झरोखे का लोकार्पण समारोह में फलोदी, लोहावट व जोधपुर से कई विद्वानों ने शिरकत की। पुस्तक को जाम्भाणी साहित्य अकादमी ने प्रकाशित किया है। गोदारा परिवार के लोग दशकों पहले यहां से हरियाणा जा बसे। बाबूजी के नाम से विख्यात हुए एडवोकेट मनीराम माधानी ने पुरखों की धरा से जुड़ाव जारी रखा। वे हर साल यहां आते रहे। खासकर जाम्भा में आयोजित होने वाले माधा मेले में पहुंचना नहीं भूलते थे। इसी दौरान उन्होंने जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, बाड़मेर व जालोर सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों से इस कदर सम्बन्ध बनाएं कि बरसों तक उनसे हुए पत्रव्यवहार को उन्होंने किताब के रूप में पिरो दिया। इसी का नाम दिया यादों के झरोखे से। इसके हर पन्ने पर उनके व्यक्तित्व की छाप झलक रही है। समारोह में पहुंचे व्याख्याता बुधाराम ईशरवाल जेसला ने उन्हें याद करते हुए कहा कि कुछ ही बरसों तक उनका सानिध्य रहा लेकिन इस दौरान 1100 पत्र मिले। जो उनके पास आज भी सुरक्षित है। वे बड़ी संजीदगी से सभी पत्रों का जवाब देते थे। हर पत्र में वे समाज, संस्कृति, इतिहास व जनजीवन से जुड़ी जानकारी लेते थे। उनका यह शोध समाज की नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करेगा। वे खुद इस पुस्तक को पूरा करना चाहते थे लेकिन एक दिन वे इस दुनिया से कूच कर गए। उनके इस सपने को उनके पुत्र व आईएएस पृथ्वीराज एवं एचसीएच अशोक बिश्नोई ने पूरा किया है। उनके साथ डॉ सुरेंद्र खीचड़ व केके जोहर ने संपादन किया है।

दोस्ती निभाने पहुंचे 98 वर्षीय पूर्व विधायक धारणिया

समारोह की अध्यक्षता के लिए 98 वर्षीय वयोवृद्ध सहीराम धारणिया (पूर्व विधायक एवं विश्नोई महासभा अध्यक्ष) पूरे जज्बे के साथ उपस्थित थे। उन्होंने एडवोकेट मनीराम के साथ बिताए पलों को साझा किया। मुख्य अतिथि मदनमोहन गुप्त तथा विशिष्ट अतिथि टंकेश्वर प्रसाद की उपस्थिति ने समारोह को गरिमामयी बनाया। पुस्तक के संपादक एवं स्व मनीराम के पुत्र पृथ्वीराज ने इस पुस्तक के लेखन और संपादन सहित इसके विभिन्न पहलुओं से साहित्य प्रेमियों का परिचय करवाया। यादों के झरोखे पुस्तक लोकार्पण समारोह का प्रारंभ हिसार सभा के प्रधान प्रदीप बेनीवाल एवं पुस्तक परिचय अकादमी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ बनवारी लाल साहू द्वारा दिया गया। इस अवसर पर सेवक दल के अध्यक्ष सहदेव कालीराणा ने एडवोकेट साहब के साथ अपने संस्मरण साझा किए और उनके साथ हुए पत्र व्यवहार को अपने जीवन की अमूल्य निधि बताया। नरसीराम थालोड़ ने एडवोकेट गोदारा के जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर एडवोकेट सुभाष गोदारा, ओपी बिश्नोई, दिल्ली प्रधान हनुमान सिंह, प्रो बाबुराम, अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ कृष्णलाल ने अपने संस्मरण साझा किए। मंच संयोजन डॉ सुरेंद्र ने किया । इस अवसर पर अकादमी की उपाध्यक्ष डॉ इंदिरा बिश्नोई बीकानेर, विनोद जम्भदास, इंद्रजीत धारणिया, कृष्णलाल काकड़, डॉ मनमोहन लटियाल आदि मौजूद थे।

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