मैथ्स पढ़ी है इसलिए जेनरेशन गेप को स्टोरी में मैनेज कर लेती हूं

Jodhpur News - सिटी भास्कर. जोधपुर| प्रभा खेतान फाउंडेशन और एहसास विमन आफ जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राइट सर्किल...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:46 AM IST
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सिटी भास्कर. जोधपुर| प्रभा खेतान फाउंडेशन और एहसास विमन आफ जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राइट सर्किल श्रृंखला का आयोजन शुक्रवार को होटल ताज हरि महल में आयोजित हुआ। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी व इंग्लिश राइटर दमन सिंह ने अपने जीवन औैर लेखनी की यात्रा को दर्शकों के साथ बांटा। उनके साथ एडवोकेट विकास बालिया ने हाल ही में प्रकाशित उपन्यास "किटीज वॉर' बात की। एडवोकेट विकास बालिया ने पहला सवाल किया, अाप जोधपुर की किस क्वालिटी से प्रभावित हुई? दमनसिंह का जवाब था, मैं दिल्ली में एक एनजीअाे चला रही थी अाैर हमने पहला प्राेजेक्ट जोधपुर में ही किया। यहां की लाइफ बहुत टफ है लेकिन सूखी जिंदगी जीने के बाद भी यहां लोगों के जीने और रहने का अंदाज अनूठा है। इसके बाद बालिया ने "किटीज वार' पर बात शुरू की। पूछा, अपने दौर से हटकर उस दौर यानि 1942 में हुए सेकंड वर्ल्ड वार के बारे में लिखना और जेनरेशन गेप को जानना कैसे संभव हुआ? ये आइडिया कैसे आया? सिंह ने कहा, जब पापा (मनमोहन सिंह) सेकंड वर्ल्ड वॉर पर बात करते और कई घटनाएं शेयर करते तो लगता था कि ये क्या घटना थी और इसमें क्या हुआ हाेगा? यह आइडिया मुझे पसंद आया। कुछ जानकारी पापा से ली ताे कुछ इंटरनेट से और कुछ इमेजिनेशन के आधार पर मैंने यह उपन्यास लिखा। कहानी लिखने का उद्देश्य यह था कि लोगों को बताया जाए कि सेकंड वर्ल्ड वॉर में इंडिया का किस तरह का योगदान रहा है और किस प्रकार लोगों पर इसका प्रभाव पड़ा। उस समय के शब्दों को लाने का काम कैसे संभव हुआ? पूछने पर सिंह ने बताया, यह काम कठिन था लेकिन उन्होंने इस दौर को पूरा स्टडी कर संभव किया। वे मैथेमेटिक्स की स्टूडेंट रही हैं इसलिए डिवाइड और कैल्कूलेशन के आधार पर जेनरेशन गेप को स्टोरी में मैनेज करने का काम आसानी से कर लेती हैं। एहसास विमन अाॅफ जोधपुर की शैलजा सिंह ने परिचय दिया। नीता मेहता ने पहली बार अंग्रेजी लेखिका को इनवाइट किया गया है। सुषमा नीरज सेठिया ने वाेट अाॅफ थैंक्स दिया।

एडवोकेट विकास बालिया ने राइटर दमनसिंह से बात की।

पैरेंट्स से यादें निकलवाना सबसे मुश्किल

उन्होंने कहा कि एक बुक लिखने के बाद वे उसे भुला देती हैं और अगली किताब पर काम शुरू कर देती हैं। अब भारत में मेंटल हैल्थ प्रॉब्लम्स पर लिखेंगी। उन्होंने सबसे कठिन क्षण तब माना जब अपने पैरेंट्स पर बुक लिखी। उन्हाेंने कहा, उनके साथ बैठकर उनकी बातों को बाहर निकलवाना एक चुनौती था।

मैथ्स की स्टूडेंट को हिस्ट्री पढ़कर कैसा लगा?

सवाल-जवाब सेशन में डीपीएस के प्रिंसिपल बीएस यादव ने पूछा, आपको मैथ्स पसंद थी लेकिन जब किटीज वॉर लिखी तो हिस्ट्री पढ़कर कैसा फील हुआ? दमन सिंह ने कहा, बाद में पढ़ा ताे अनुभव हुआ कि हिस्ट्री भी एक रोचक विषय है। अगला सवाल था, 1984 में हुए दिल्ली के दंगों काआपकी सोच पर कोई असर आया? लेखिका ने कहा, मैं सिख समुदाय से थी और पिता के 12-15 घंटे इंटरव्यू देने में ही बीतते थे। हमारे घर में ऐसी कोई बात नहीं होती थी। इसलिए उनकी सोच पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। उन्होंने कहा, मैं लिखते समय मैं किसी को इसे देखने भी नहीं देती हूं और अपनी पसंद व समय की मांग के अनुसार शब्दों का चयन करती हूं।

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