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उम्मेद क्लब की सदस्यता से डिबार किए सदस्य गौरव भंडारी को कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, प्रार्थना पत्र खारिज

Jodhpur News - उम्मेद क्लब की सदस्यता से डिबार किए गए सदस्य गौरव भंडारी को कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश...

Jan 16, 2020, 08:55 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news member gaurav bhandari debarred from umaid club membership did not get relief even from court application dismissed
उम्मेद क्लब की सदस्यता से डिबार किए गए सदस्य गौरव भंडारी को कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश संख्या दो जोधपुर महानगर सुश्री ज्योति देवी शर्मा ने भंडारी को डिबार करने के विरूद्ध दायर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। मामले के अनुसार उम्मेद क्लब ने 25 अक्टूबर, 18 को प्रार्थी गौरव भंडारी को नोटिस भेजा। जिसमें बताया गया, कि मैसर्स राधिका टाइल्स ने उनके द्वारा किए गए सत्यापन के आधार पर न केवल निम्न स्तरीय सामग्री का उपयोग कर भुगतान क्लब से उठाया है, बल्कि कोटेशन व अधिकतम मुद्रित मूल्य से भी अधिक राशि प्राप्त की है। इसके बचाव में यह कहा गया कि सत्यापन केवल कार्य पूर्ण हो जाने के आधार पर किया है जो कि नितांत अविश्वसनीय है। यह कृत्य क्लब मेमोरेन्डम ऑफ एसोसिएशन की धारा 6 (3) के तहत क्लब व उसके सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार अर्थात दुराचरण की श्रेणी में आता है। कार्यकारिणी ने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन की धारा 6 (4) उपधारा (बी) के तहत भंडारी व उसके परिवार के सदस्यों को क्लब परिसर में प्रवेश पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी।

प्रार्थी भंडारी ने प्रार्थना पत्र दायर कर कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि गत 25 अक्टूबर 18 को भेजा गया नोटिस पूर्णतया गलत, विधिविरूद्ध व मिथ्या है। नोटिस में वर्णित तथ्यों की सच्चाई व सत्यता से कोई सरोकार नहीं हैं। प्रार्थी ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया है, जिसके लिए उसे व उसके परिवार के सदस्यों को डिबार किया जाए। अप्रार्थी क्लब की ओर से बताया गया कि जायज तौर पर प्रार्थी से स्पष्टीकरण मांगा गया था और वे उचित स्पष्टीकरण देने में असफल रहे। प्रार्थी का उत्तर कतई संतोषप्रद नहीं था।

कोर्ट ने दोनों पक्ष सुनने के बाद कहा कि प्रार्थी प्रथम दृष्टया मामला अपने पक्ष में साबित करने में असफल रहा है। प्रथम दृष्टया मामला प्रार्थी के विरूद्ध निर्णीत किया गया है। ऐसी स्थिति में तुलनात्मक रूप से प्रार्थी को असुविधा व अपूर्णनीय क्षति होना भी दर्शित नहीं होता है। कोर्ट ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

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