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आयकर कार्मिकों का असहयोग आंदोलन, आला अफसरों को नहीं मिल रही रोजमर्रा की रिपोर्टें

एक वर्ष पहले
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आयकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के जाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन के आह्वान पर विभाग में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन आला अधिकारियों के लिए परेशानी बनने लगा है। वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में रेवेन्यू कलेक्शन के टारगेट पूरा करने के लिए अधिकारियों को रोजमर्रा की रिपोर्ट तक नहीं मिल पा रही है। इसका सबसे प्रमुख असर पड़ रहा है केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘विवाद से विश्वास’ के तहत लंबित मामलों का निस्तारण करके करोड़ों रुपए की बकाया वसूली पर। चूंकि, इस योजना में सरकार का लक्ष्य तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपए की वसूली का है, लेकिन मार्च में विभाग की टीम के असहयोग से इसकी नियमित मॉनिटरिंग पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इनकम टैक्स गजेटेड ऑफिसर्स एसोसिएशन (आईटीगोआ) व इनकम टैक्स एंप्लाइज फेडरेशन (आईटीईएफ) से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी ऑफिस पहुंच कर रोजमर्रा के काम तो कर रहे हैं, लेकिन सर्वे या आयकर छापों से जुड़े मामलों और उच्च अधिकारियों को प्रतिदिन भेजी जाने वाली रिपोर्टों के मामले में वे असहयोग आंदोलन की राह पकड़ चुके हैं। उल्लेखनीय है कि इन दोनों ही यूनियन के जाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (जेसीए) द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर पिछले कई महीनों से विभाग के उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान का आग्रह कर रहे हैं।

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