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अब उनके विकास के बारे में सोचना होगा, जो धरती बिछाते हैं आसमान ओढ़ते हैं और भूख खाकर सो जाते हैं: प्रो. सांवरिया

Jodhpur News - सिटी भास्कर. जोधपुर| दलितों के लेखन और समाज व संस्कृति के बारे में विचार करने के साथ इनके स्तर के बारे में भी विचार...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:15 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news now it will have to think about their development who lay down the earth skyrocket their head and go to sleep after hunger prof sanwariya
सिटी भास्कर. जोधपुर| दलितों के लेखन और समाज व संस्कृति के बारे में विचार करने के साथ इनके स्तर के बारे में भी विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि वो धरती बिछाते हैं, आसमान ओढ़ते हैं, अपने पसीने से नहा लेते हैं और भूख ओढ़कर सो जाते हैं। इसलिए इन्हें मुख्य धारा से जोड़ने की जरुरत है। यह कहना था वरिष्ठ साहित्यकार रतन कुमार सांवरिया का। वे जेएनवीयू के हिंदी विभाग की ओर से शनिवार से गांधी शांति प्रतिष्ठान में शुरू हुए दो दिवसीय "हाशिए का साहित्य, समाज व संस्कृति' विषयक नेशनल सेमिनार के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार प्रो. कौशलनाथ उपाध्याय ने कहा कि जो साहित्यकार मनुष्य के लिए लेखन कर रहा है, वह हाशिए के समाज के लिए लेखन नहीं कर सकता। उद्घाटन सत्र के अध्यक्षीय उद्बोधन में वीसी प्रो. गुलाब सिंह चौहान ने कहा कि हाशिए के समाज को मुख्य धारा से जोड़कर उनका विकास करें और साहित्य में उनको स्थान मिले क्योंकि उनके द्वारा साहित्य के जो रूप और प्राकृतिक अंदाज सामने आएंगे, वे अनूठे होंगे। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जामिया मिलिया विश्वविद्यालय से आई प्रो. हेमलता थीं। उन्होंने हाशिए के समाज और साहित्य के बारे में बात करते हुए उनकी समस्याओं का दर्शन करते हुए कहा, ये समाज पिछड़ा हुआ है और इन पर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ये समाज व्यापक है और बहुत विषयों में धनी है। केवल उन्हें परिभाषित करने की आवश्यकता है। वर्तमान की परिस्थितियों को देखकर इनके पक्ष में उचित निर्णय लिए जाने की जरूरत है।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ कथाकार बाबू लाल सांवरिया ने कहा, दलित समाज सदियों से पीड़ित और उपेक्षित होता आ रहा है और साहित्य के द्वारा उनके समाज और संस्कृति का दर्शन कराकर उन्हें उठाया जा सकता है। उन्हें कुछ ऐसे क्षेत्र दिए जा सकते हैं जहां उन्हें मंच मिल सके। दूसरे तकनीकी सत्र में बतौर मुख्य वक्ता डॉ. नीलम पांडे ने दलितों को मुख्य धारा से जोड़ने की बात कही। इसमें मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा कर्मा थीं। डॉ. कालूराम परिहार ने दलितों के साहित्य और हाशिए के समाज की विस्तृत जानकारी और उनकी स्थिति क्षेत्रों के अनुसार बताई। साथ ही उनकी प्रतिभाओं और भौगोलिक सीमाओं को बताकर उन्हें स्थान देने की बात कही। संचालन डॉ. प्रवीण चंद ने किया।

जेएनवीयू के हिंदी विभाग की ओर से दो दिवसीय नेशनल सेमिनार में देश के कई वरिष्ठ साहित्यकार ले रहे हैं हिस्सा

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