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विषम परिस्थितियों में आरपीएससी एचएम परीक्षा में प्रदेश में तीसरा व जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया
कहते हैं कि जो महिला विपरीत परिस्थितियों से निकलकर संघर्ष की कहानी को अपने जीवन में उतार कर कुछ कर पाने का हौसला रखती है तो वह अवश्य ही सफलता के परचम को लहराती हैं। फिर चाहे उनके सामने कोई भी बाधा उत्पन्न हो वह बाधाओं से संघर्ष करते हुए बुलंदी के रास्ते को छूती हैं। ऐसी ही कहानी भोपालगढ़ उपखंड क्षेत्र के बुड़किया गांव की राबामावि के प्रधानाध्यापक सरिता श्रीमाली की है। सरिता ने बताया कि उनके पिता विनोद श्रीमाली शुरू से ही गरीब परिवार से थे। पिता सिलाई का कार्य करते थे, इससे घर का खर्चा भी नहीं निकलता था। उन्होंने 12वीं तक राबाउमावि जाजपुर में पढ़ाई की। इस दौरान फटे कपड़ों में आठवीं तक स्कूल जाना पड़ा था। पिता के 3 बेटियां थीं, बेटे नहीं थे तो उन्होंने बेटियों को बेटे के समान अथक मेहनत करते हुए पढ़ाई करवाने का संकल्प लिया। दिन-रात सिलाई का कार्य करते हुए अपनी बेटी सरिता को शिक्षा में बीएड व एमए हिंदी में करवाई। वहीं सरिता ने भी पिता के सपने को टूटने नहीं देने का जज्बा उत्पन्न करते हुए 2015 में व्याख्याता परीक्षा हिंदी में भाग लिया। लेकिन वेटिंग लिस्ट में पीछे रह गई तो हिम्मत टूट गई थी। ऐसे में सास सरोज दवे व पति संदीप दवे ने सरिता की पढ़ाई में रूचि देखते हुए उन्हें हौसला बंधाते हुए पढ़ाई जारी रखने का संबल दिया। 2017 में राजस्थान में हिंदी व्याख्याता में सरिता ने 32वां स्थान प्राप्त किया। फिर रुकने का नाम नहीं लेते हुए 17 अक्टूबर, 2019 में हैडमास्टर पद पर परिणाम में जोधपुर जिले में प्रथम व प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए नारी शक्ति की एक अलग ही पहचान बनाई। आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए सरिता एक प्रेरणास्रोत बनी हुई है। सरिता ने बताया कि मन में कठोर परिश्रम करने की लगन हो तो सफलता अपने आप ही मिलती हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष