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महिलाओं की लीडरशिप में चल रहे इन ग्रुप में काम करती हैं सिर्फ महिलाएं

एक वर्ष पहले
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तमन्ना आज भी इन्हीं महिलाओं के साथ बैठकर काम करती हैं।

ग्रुप की बनाईं पहली चादर है जिसे वे हर इवेंट में साथ रखती हैं।

तमन्ना खुद एक फैशन डिजाइनर है और एमए बीएड कर चुकी हैं। शादी के बाद अपने आसपास की महिलाओं की पीड़ा को देखा। पापड़-बड़ियां बनाने वाली इन महिलाओं के हाथों में गांठें बन गई थीं। इनकी मजबूरी यह थी कि काम न करें तो घर कैसे चलता? तमन्ना ने बताया, मैं इनके लिए कुछ करना तो चाहती थी लेकिन शुरुआत करने के बारे में समझ नहीं आ रहा था। मैंने अपने घर पांच-सात महिलाओं को बुलाकर पढ़ाना शुरू किया। वे डरी-सहमी आतीं। उन्हें सक्षम बनाने के लिए उन्हें साथ लेकर ही डोर टू डोर गई और दूसरी महिलाओं को एकत्र किया। इस तरह ग्रुप बनाकर इन्हें सिलाई और हैंडीक्राफ्ट के काम सिखाए। दिक्कत यह आई कि हर माह ये महिलाएं पीरियड्स के दौरान 5-7 दिन छुट्टी ले लेतीं। इसका हल करनेके लिए हमने सेनेट्री पेड की मशीन ही लगा ली। इन दिनों शहर में दो जगह चल रहे उनके ग्रुप में करीब 150 महिलाएं हैं। ये महिलाएं राजस्थान का रिप्रजेंट करने के लिए हाथी और ऊंट को फैब्रिक से बनाकर एक्सपोर्ट कर रहीं हैं। एंब्रॉइडरी, वन पीस गाऊन, स्कर्ट और सभी प्रकार के डिजाइनर क्लॉथ बनाकर लोकल मार्केट में सप्लाई कर रहे हैं। भाटी ने बताया कि जो महिलाएं कभी एक रुपए के लिए परिवार पर निर्भर रहती थीं, वे अब खुद को और परिवार को संभालने की जिम्मेदारी ले चुकी हैं।

जोधपुर जैसी जगह पर बंगाल के काथा और सिंध की रेल्ली एंब्रॉइडरी, पाकिस्तान व महाराष्ट्र के पैच और एपलिक वर्क को फैलाने वाली सृष्टि सेवा संबल की टीम लीडर प्रेमवती ने बताया, मेरे पति आर्मी में जॉब करते थे और काश्मीर में उनकी पोस्टिंग थी। बच्चे छोटे थे और मैं सास के पास अकेली रहती थी। अकेलापन दूर करने के लिए सिलाई और एंब्रॉइडरी का काम करने का सोचा। मैंने प्रॉपर सिलाई और बंगाल, महाराष्ट्र के साथ सिंध की आर्ट भी सीखी। काम बढ़ा तो मैंने पांच महिलाओं को जोड़ा। इसी बीच दूरदर्शन पर कल्याणी ग्रुप का प्रोग्राम आता था। उससे मोटीवेट हो अपने कल्याणी ग्रुप बनाया।

वे कहती हैं, जब महिलाओं की जोड़ने के लिए उनके घरों में जाने लगी तो पुरुष यह कहते हुए मुझे भगा देते थे कि इस मैडम को घर में मत घुसने दो, ये महिलाओं को बिगाड़ रही है। लोगों की गालियां और ताने खाकर पहले एक ग्रुप बनाया जो अब 25 तक बढ़ गए हैं। आज जोधपुर में इनमें करीब 4 हजार महिलाएं काम कर रही हैं। जो बाजार की जरुरत के हिसाब से प्रॉडक्ट और डिजाइन तैयार कर रही हैं। ग्रुप कितना मेहनती है कि इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एक दिन में तीन हजार महिलाएं दस हजार कपड़े की डिजाइनर थैलियां बनाकर सप्लाई कर चुकी हैं।

तमन्ना भाटी, संचालक, हमारा साहस


प्रेमवती, संचालक, सृष्टि सेवा संबल


पहले फील्ड में ले जाकर सक्षम बनाया फिर इन्हें खुद की जंग लड़ना सिखाया


जो मुझे धक्का दे भगाते थे, वे अब प|ी को यहां खुद छोड़ने आते हैं
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