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आजीवन सदस्यता शुल्क एक लाख करने का विरोध शुरू, पुराने शुल्क पर सदस्य बनने उमड़े वकील

एक वर्ष पहले
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जोधपुर। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के विपरीत अधिवक्ता कल्याण कोष के आजीवन सदस्यता शुल्क को 30 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपए करने का विरोध शुरू हो गया है। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने इस बढ़ोतरी पर विरोध जताते हुए बार काउंसिल को इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है, जबकि कुछ वकीलों ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति जताई। वहीं बढ़े हुए शुल्क का नोटिफिकेशन जारी नहीं होने पर पुराने शुल्क से सदस्य बनने के लिए वकील आवेदन जमा कराने के लिए उमड़ पड़े। एक ही दिन में करीब 1500 फॉर्म जमा हुए और शुल्क पेटे करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए बार काउंसिल को प्राप्त हुए। बार काउंिसल ऑफ राजस्थान के सदस्यों ने सर्वसम्मति से अधिवक्ता कल्याण कोष की सदस्यता शुल्क में बढ़ोतरी कर मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजे प्रस्ताव में आजीवन सदस्यता शुल्क 17 हजार 900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपए करना शामिल था। वेलफेयर टिकट 25 से बढ़ा 50 रुपए करने का प्रस्ताव भेजा था। सरकार ने बाकी प्रस्तावों को यथावत रखा, आजीवन सदस्यता शुल्क को 17900 रुपए से बढ़ा 1 लाख कर दिया और विधानसभा से प्रस्ताव पारित करा दिया। इसी तरह वेलफेयर टिकट भी 25 रुपए की बजाय 100 व 200 रुपए कर दिया। आजीवन शुल्क व वेलफेयर टिकट में बढ़ोतरी का विरोध शुरू हो गया है। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक अध्यक्ष रणजीत जोशी की अध्यक्षता में हुई। कार्यकारिणी ने इस बढ़ोतरी को अनुचित बताते हुए बार काउंसिल से इस पर पुनर्विचार करने को कहा व पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार आजीवन सदस्यता शुल्क बढ़ाने की मांग की गई है। बैठक में महासचिव प्रहलादसिंह भाटी, उपाध्यक्ष सज्जनसिंह करनावत, सहसचिव गजेंद्रसिंह तंवर, पुस्तकालय सचिव डिंपल भाटी, कोषाध्यक्ष बीरबलराम विश्नोई उपस्थित थे। वहीं एडवोकेट्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नाथूसिंह राठौड़ व लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष देवकीनंदन व्यास सहित अन्य वकीलों ने बढ़ोतरी पर कड़ी नाराजगी जताई व कहा कि वकीलों पर अतिरिक्त बोझ है। पूर्व महासचिव राठौड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को एडीएम एमएल नेहरा से मिलकर गवर्नर के नाम ज्ञापन सौंपा तथा अधिवक्ता कल्याण कोष के आजीवन सदस्यता शुल्क को एक लाख रुपए करने के पारित प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
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