प्रहलाद को बचाने खंभ तोड़ भगवान नृसिंह प्रकटे, मलूके का किया वध

Jodhpur News - कम्युनिटी रिपोर्टर | जोधपुर शहर के भीतरी भाग स्थित गंगश्यामजी मंदिर में शुक्रवार शाम दो घंटे तक मलूका बच्चों को...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:41 AM IST
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कम्युनिटी रिपोर्टर | जोधपुर

शहर के भीतरी भाग स्थित गंगश्यामजी मंदिर में शुक्रवार शाम दो घंटे तक मलूका बच्चों को डराता रहा। कभी मंदिर के गुंबद और छतरी तो कभी मंदिर के बाहर गलियों में घूम-घूमकर बच्चों को डरा रहा था। बच्चे भी उसे दूर से ले मलूका..ले मलूका बोल रहे थे। उसने प्रहलाद बने नन्हे बालक को डराया तो नृसिंह भगवान अवतरित हुए और संध्याकाल में उसका जब अंत किया तो नृसिंह भगवान के जयघोष से मंदिर परिसर गंूज उठा।

जगह-जगह स्वागत| मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज की ओर शरबत, ठंडाई, आइसक्रीम, मिल्करोज, पानी, कचौरी आदि की निशुल्क व्यवस्था की गई। इस दौरान मग समाज के विभिन्न संगठनों और समितियों के अलावा श्री रामेश्वर दयालजी सेवा संस्थान और नवयुवक मंडल के सदस्यों ने विशेष सहयोग दिया।

नृसिंह मंदिर में होती है पूजा

नृसिंह भगवान के पीले वस्त्र और मुखोटे की सिटी पुलिस स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना होती है। इस मौके पर मंदिर में आकर्षक फूल मंडली की गई और भक्तों द्वारा कीर्तन किया गया। साथ ही प्रसादी भी वितरित की गई।

सजी फूलमंडली, भगवान नृसिंह के मुखौटे की पूजा की, महाआरती के साथ हुआ मेले का समापन

जैसे ही सवा मण वजनी मुकुट पहने प्रेमराज शर्मा 8-10 लोगों के बीच आए तो बच्चे-बड़े चिल्लाने लगे मलूका...ए...मलूका और मलूका उन लोगों के बीच पहुंचकर उनको डराता है। इस बीच शांतचित में भगवान नृसिंह का स्मरण करते प्रहलाद का रूप धारण कर नन्हा बालक अर्जुनदास बैठ जाता है। काफी देर तक मलूका बालक को भी डराता है। इस बीच खंभ फाड़कर पीले वस्त्र व करीब पांच किलो वजनी शेर का मुखौटा धारण कर नृसिंह भगवान का रूप धरे दुर्लभ शर्मा आते हैं और भक्त नृसिंह भगवान के जयकारे लगने लगते हैं। भगवान नृसिंह मलूके का अंत करते हैं और अचानक अदृश्य हो जाते हैं। महाआरती के बाद मेले का समापन होता है। मंदिर के मुख्य पुजारी मुन्नसा ने बताया कि मेले से पूर्व गंगश्यामजी की विशेष पूजा-अर्चना कर आकर्षक फूलमंडली की गई। इस दौरान विधायक मनीषा पंवार व हेमंत शर्मा ने पूजा-अर्चना की।

महाराजा अभयसिंह जीत लाए थे मुखौटा

महाराजा अभयसिंह ने मुगल साम्राज्य के समय अहमदाबाद से दल-बादल नामक बड़ा शामियाना, इंद्र विमान नामक हाथी का रथ, अष्ट धातु से निर्मित और सवा मण वजनी भगवान नृसिंह का मुखौटा और बहुमूल्य वस्तुएं जीतकर लाए थे। भगवान नृसिंह का मुखौटा उन्होंने गंगश्यामजी मंदिर को भेंट किया। तब से आज तक इस मुखौटे की पूजा-अर्चना होती है। साथ ही जो व्यक्ति इसे धारण करता है, वो पूरे दिन भगवान नृसिंह की तपस्या में लीन रहता है।

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