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\"ठोकर की पोथी के आगे बस्ता छोटा लगता है/ जबसे छाले ठीक हुए हैं, रास्ता छोटा लगता है

एक वर्ष पहले
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जोधपुर| थली मित्र परिषद की अाेर से आयोजित होली स्नेह मिलन कवि सम्मेलन में देश के ख्यातनाम कवियों ने शिरकत कर देर रात तक साहित्य प्रेमी श्रोताओं को काव्य रंगों से रंगकर फागोत्सव को यादगार बना दिया। खेजड़ला से आए हास्य व्यंग्य कवि श्रवणदान शून्य ने \\\"ठोकर की पोथी के आगे बस्ता छोटा लगता है/ जबसे छाले ठीक हुए हैं रास्ता छोटा लगता है/ मां की ले आशीष चलूं तो सारी बलाएं टल जाती है/ मन की सैनिक टुकड़ी का फिर दस्ता छोटा लगता है\\\' सुनाई तो पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दरभंगा से आए कवि ऋषिकेष झा ने हास्य रस से काव्यपाठ की शुरुआत कर वीर रस से अपने काव्यपाठ का समापन कर श्रोताओं की दाद बटोरी।

बुलंदशहर (यूपी) से आए वीर रस के कवि आकाश नौरंगी ने महिला दिवस पर अपनी विशेष प्रस्तुति, \\\"कसम उठा लो आज यहीं पर अंगारे बरसाओगी/ गर अस्मत पर हाथ उठे तो हाथ काटकर लाओगी\\\' सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। नौरंगी ने बहुत सारी वीर रस की कविताओं से श्रोताओं को राष्ट्र प्रेम से सराबोर कर दिया। कवि नौरंगी के काव्य पाठ के बीच-बीच में \\\"भारत माता की जय\\\' के नारे बार-बार गूंजते रहे।
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