संतों ने किया शाकाहार अपनाने का आह्वान
रामस्नेही संप्रदाय आचार्य पीठ रामधाम खेड़ापा में होली फूलडोल मेला महोत्सव के उपलक्ष्य में रामधाम खेड़ापा वर्तमान आचार्य पुरुषोत्तमदास महाराज के पावन सानिध्य में चली रही भागवत कथा रामधाम सींथल पीठाधीश्वर आचार्य क्षमाराम महाराज के मुखारविंद से चतुर्थ दिन कथा प्रसंग में राजा परीक्षित के राज में कलयुग का प्रवेश होने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग मान, आदर, बड़ाई, माया, भोग आदि में ही रचे-पचे हैं वे साधना एवं मुक्ति मार्ग की ओर अग्रसर नहीं हो सकते। शनिवार को कथा के दौरान पाली सांसद पीपी चौधरी पहुंचे और निज मंदिर में दर्शन किए। कथा में आचार्य से आशीर्वाद भी लिया।
राजा परीक्षित के राज में कलयुग के प्रवेश का सुनाया प्रसंग
भास्कर न्यूज|भोपालगढ़
रतकुड़िया गांव स्थित लोकसंत भोलाराम महाराज की देवरीधाम स्थित रूपरजत गोशाला में सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दिगंबर संत रयणसागर महाराज ने कहा कि भोजन तीन प्रकार का होता है राजसिक, तानसिक और सात्विक। राजसिक भोजन को राजा महाराजा करते हैं जिसमें अहंकार की भावना होती है इसलिए अहंकार वाला भोजन नहीं करना चाहिए। तानसिक भोजन करने वालों में हिंसा की भावना अधिक होती है एवं ब्रह्मचार्य का नाश होता है इसलिए तानसिक भोजन जैसे आलू प्याज सहित जमीन कंद का त्याग करना चाहिए। सात्विक भोजन सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह भोजन साधु का भोजन माना जाता है जिसमें ना तो अहंकार की भावना होती है और ना ही छल कपट और गुस्से की भावना होती है। मनुष्य को जीवन में रात्रि भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि रात्रि भोजन करने वाला अहिंसा धर्म का पालन नहीं कर पाता। शाकाहार से बढ़कर कोई पुण्य नहीं होता शाकाहारी भोजन करने वाले के घर में लक्ष्मी का वास होता है। इस मौके महंत रमैयादास महाराज, गरीब दास महाराज, हीरादास महाराज, रामदास शास्त्री, बालूदास महाराज, राज्य सभा सांसद रामनारायण डूडी, जगदीश डूडी, नारायणराम जाखड़ आदि मौजूद थे।
रामधाम खेड़ापा में होली फूलडोल मेला महोत्सव