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29 साल की उम्र में खेतासर के सरपंच बन गए थे शंभूसिंह 1978 में गांव में ले आए बिजली, फिर 26 साल सरपंच रहे

Jodhpur News - 29 वर्ष में स्नातक की अपनी पढ़ाई पूरी कर वर्ष 1978 में गांव लौटे तो ग्रामीणों ने शंभूसिंह खेतासर को पंचायत चुनाव में...

Jan 19, 2020, 08:55 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news shambhusinh became the sarpanch of khetasar at the age of 29 brought electricity to the village in 1978 then remained sarpanch for 26 years
29 वर्ष में स्नातक की अपनी पढ़ाई पूरी कर वर्ष 1978 में गांव लौटे तो ग्रामीणों ने शंभूसिंह खेतासर को पंचायत चुनाव में उतारा। तब के सरपंच धनाराम जांगू के नेतृत्व में नया सरपंच चुनने के लिए चर्चा चल रही थी। जांगू ने उच्च शिक्षित शंभूसिंह खेतासर का नाम आगे किया। फिर सभी ग्रामीणों की सर्व सहमति से वर्ष 1978 में ग्राम पंचायत खेतासर का निर्विरोध सरपंच चुन लिया। उच्च शिक्षित होने के चलते खेतासर ने अपने गांव सहित आसपास के गांवों में भी विकास के काम में कई सरपंचों की मदद की। वे 26 वर्ष तक ग्राम पंचायत खेतासर के सरपंच रहे। बाद में उनकी प|ी भी सरपंच रहीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने स्कूल, सड़क, पटवार भवन, नालियों का निर्माण, बस स्टैंड, सहकारी भवन, पंचायत भवन,पशु चिकित्सालय, स्वास्थ्य केंद्र खुलवाए। मुख्य गांव के अलावा विष्णुनगर, धोलिया नगर, लेगा की ढाणी, सिंवरों की ढाणी, प्रेम सागर, खेता नाडा, भलासरिया आदि गांव में नए स्कूल खुलवाए। उस समय खेतासर ग्राम पंचायत में खेतासर,भलासरिया, बेह चारणान, धोलिया नगर सहित कई गांव शामिल थे। पंचायत का क्षेत्रफल भी काफी बड़ा था। सरपंच बनते ही 1978 में गांव में पहली बार बिजली पहुंचाई। खेतासर ने अपने खुद के कुएं पर इंजन लगाकर ग्रामीणों के लिए पेयजल की व्यवस्था की। उसके बाद आगामी वर्षों में गांव तलिया सहित विभिन्न राजस्व गांवों ढाणियों में नए सरकारी नलकूप भी खुदवाए।

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मरीजों को अपने वाहन से अस्पताल पहुंचाते

बीमार व घायलों की मदद में खुद का वाहन देते हैं। सैकड़ों लोगों के बीपीएल कार्ड बनवा कर सहयोग भी किया। उनके कार्यकाल में गांव में पुलिस का दखल नहीं के बराबर रहा। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में ओसियां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधायक का चुनाव लड़ा और कांग्रेस के दिग्गज नेता महिपाल मदेरणा को कड़ी टक्कर दी। दूसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2009 के आम चुनाव में बसपा के टिकट पर पाली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 2013 और 2018 में भाजपा के टिकट पर सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने चुनाव लड़ा।

गहलोत के सामने चुनाव लड़ने का तोहफा मिला: मुख्यमंत्री गहलोत के सामने वर्ष 2013 में सरदारपुरा से भाजपा प्रत्याशी रहने के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार के समय खाद बीज निगम के चेयरमैन (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) रहे। विधायक का चुनाव नहीं जीते पाए लेकिन उन्होंने सुमेर स्कूल व जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के छात्रसंघ चुनाव में अशोक गहलोत को हराया था।

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