जेएनवीयू में हुई 2012-13 भर्ती की जांच के लिए राज्य सरकार ने बनाई कमेटी

Jodhpur News - जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में वर्ष 2012-13 में हुई भर्ती की जांच के लिए राज्य सरकार ने नई कमेटी का गठन किया है।...

Nov 21, 2019, 09:00 AM IST
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में वर्ष 2012-13 में हुई भर्ती की जांच के लिए राज्य सरकार ने नई कमेटी का गठन किया है। पूर्व की भाजपा सरकार ने भी इस मामले की जांच दशोरा कमेटी से कराई थी जिसमें भर्ती में गड़बड़ी और अनियमितता हाेना माना था पर अब सरकार ने मामले को नया मोड़ देते हुए नई कमेटी का गठन किया है।

दरअसल, राज्य सरकार ने 11 नवंबर को एक आदेश जारी कर कहा कि वर्ष 2012-13 में जेएनवीयू में शिक्षक भर्ती मामले हुई कार्रवाई को अनुचित और एकतरफा बताते हुए प्रभावित शिक्षकों ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर प्रदान करने की गुजारिश की थी, साथ ही नए सिरे से जांच करवाने का अनुरोध किया था। जिस पर सरकार ने 7 सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करेंगी। इस कमेटी में संयोजक कोटा विवि के पूर्व कुलपति प्रो. बीएम शर्मा को बनाया गया था। सदस्य के तौर पर पूर्व कुलपति गोरखपुर विवि के प्रो. पीसी त्रिवेदी, सेवानिवृत्त प्रो. पीएस वर्मा, राजस्थान विवि के प्रो. जेपी यादव, संयुक्त निदेशक कॉलेज शिक्षा आरसी मीणा, राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता गणेश परिहार एवं संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा डॉ. मोहम्मद नईम को लिया गया है। गौरतलब है कि जेएनवीयू में हुई 2012-13 की भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को लेकर राज्य सरकार ने प्रो. दशोरा के संयोजन में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने मामले जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार एवं राजभवन को भेज दी थी। राजभवन से यह रिपोर्ट जेएनवीयू में भेजकर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विवि प्रशासन ने पहले तो कई माह तक सिंडीकेट की बैठक नहीं कराई। जब सिंडीकेट की बैठक कराई तो एजेंडे को ही गायब कर दिया गया।

पहली रिपोर्ट खारिज नहीं, दूसरी बना दी

2012-13 की भर्ती से जुड़े मामले की जांच पूर्व में प्रो. दशोरा कमेटी ने की थी। कमेटी ने अपनी पूरी रिपोर्ट सबमिट कर दी लेकिन इस पर ना राज्य सरकार ने और ना ही विवि प्रशासन ने कोई कार्रवाई की। यहां तक रिपोर्ट को विवि की सिंडीकेट बैठक में नहीं रखा गया, अब नई कमेटी जांच करेगी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब पहली कमेटी की रिपोर्ट पेश ही नहीं हुई, उस पर कोई एक्शन या खारिज नहीं हुई है ताे दूसरी कमेटी क्यों बनाई गईं? मामले काे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

हमारा पक्ष सुना ही नहीं, पेश की रिपोर्ट

इधर, 2012-13 की भर्ती में शामिल होकर आए शिक्षकों ने कहा कि पूर्व की कमेटी प्रभावितों से मिली ही नहीं। एक तरफा कार्रवाई करते हुए बिना पक्ष सुने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी। अब उम्मीद है कि यह कमेटी हमारा पक्ष सुनेगी।

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