कोराेना का संदिग्ध निकला स्वाइन फ्लू पॉजिटिव, परिजन घर ले गए
नर्सिंगकर्मी समझाते रहे लेकिन परिजन नहीं माने
देश भर में कोरोना का इतना शोर है कि दूसरी बीमारी पर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है। ऐसा ही एक मामला एमडीएमएच में देखने को मिला। प्रताप नगर की 59 वर्षीय महिला को कोरोना संदिग्ध मानकर एमडीएम में भर्ती किया, लेकिन जांच में महिला को स्वाइन फ्लू निकला। इस पर उन्हें कोरोना आइसोलेशन वार्ड से स्वाइन फ्लू वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन परिजन वार्ड को खराब बताकर मरीज को सुबह 9 बजे ही घर ले गए। जानकारी के अनुसार वार्ड में मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें आइसोलेशन की जरूरत बताकर वहीं रुकने के लिए कहा, लेकिन परिजन नहीं माने। मरीज के पति ने भर्ती टिकट पर लिखा कि वे मर्जी से प|ी को घर लेकर जा रहे हैं। नर्सिंगकर्मी ने उन्हें सभी तरह से बीमारी की गंभीरता के बारे में बताया कि यदि मरीज के कुछ भी होता है तो अस्पताल प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई भी यह लिखकर अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड से घर जा सकता है? और खुद के परिवार और शहरवासियों को खतरे में डाल सकता है? हालांकि मरीज को परिजनों ने घर पर आइसोलेशन में रखा है। इस साल में स्वाइन फ्लू का यह दसवां केस है।
परिजन: वार्ड इतना हाइजेनिक नहीं, इससे अच्छा तो घर पर आइसोलेशन कर लेंगे
परिजनों से जब एमडीएम के स्वाइन फ्लू वार्ड से घर आने का कारण पूछा तो परिजनों ने बताया कि पहले कोरोना संदिग्ध मानकर हमें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रखा था, लेकिन स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आने के बाद दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। वह वार्ड बहुत ही खराब था और हाइजेनिक भी नहीं था। इसलिए हमने मरीज को घर लाना उचित समझा। मरीज को एक कमरे में आइसोलेट किया हुआ है। परिवार के सदस्य भी मास्क लगाकर ही उनके पास आते-जाते हैं। चिकित्सा विभाग की टीम भी आकर देखकर गई और सभी काे टेमीफ्लू की दवा देकर गई है।
2 दिन बाद चिकित्सा विभाग ने कराया सर्वे
कोरोना के शोर में चिकित्सा विभाग इतना व्यस्त है कि स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आने वाले मरीज के घर पर सर्वे कराना ही भूल गया। विभाग ने शहर में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मरीज के घर पर दो दिन बाद स्वाइन फ्लू संबंधी सर्वे कराया। टीम बुधवार को मरीज के घर पहुंची और सभी लोगों को टेमी फ्लू दी। आसपास के घरों में भी सर्वे किया।