दर्शक थिएटर तक नहीं आते इसलिए अब गलियों और कैफे में शुरू हाेंगे नाटक मंचन
new trend
शहर में सांस्कृतिक गतिविधियां तो बढ़ गई हैं लेकिन दर्शकों का रुझान उतना नहीं दिख रहा। कुछ फेमस और कॉमेडी नाटक में टाउन हॉल जरूर खचाखच रहता है लेकिन अधिकांश नाटकों को देखने ज्यादा लोग नहीं पहुंचते। कई लोग नाटक देखना चाहते हैं लेकिन व्यस्तता या दूरी की वजह से टाउनहॉल नहीं पहुंच पाते। दूरदराज के लाेग बार-बार नाटक देखने के लिए टाउन हॉल नहीं आ सकते और ना ही छोटे समूह के लोग नाटक देखने के लिए आ सकते हैं। ऐसे में अभिनय गुरुकुल एक्टिंग स्टूडियो ने नई पहल की है। व्यास ने बताया कि इस पहल से समाज के छोटे समूह भी नाटकों का आनंद ले सकेंगे और इससे उनका नाटकों की ओर रुझान बढ़ेगा। व्यास ने बताया कि हर सप्ताह शहर की गलियां, चौराहों व चर्चित स्पॉट पर ऐसे नाटक मंचित किए जाते रहेंगे ताकि कलाकारों को केवल टाउन हॉल पर ही निर्भर नहीं रहना पड़े और नाटकों को स्थान, कलाकार और मिल सके। संस्था के अरू व्यास ने बताया, शनिवार काे एक्टिंग स्टूडियो की अाेर से शहर में दाे अलग-अलग जगहाें पर नाटक मंचित किए जाएंगे। पहला नुक्कड़ नाटक \\\"बंदे में था दम\\\' शाम 4 बजे घंटाघर चौराहे पर मंचित किया जाएगा वहीं दूसरा नाटक शाम 5:30 बजे कैफे पर्पल में होगा जो एड्स अवेयरनेस पर आधारित नाटक \\\"टच मी\\\' है।
दांडी यात्रा पर आधारित है \\\"बंदे में था दम\\\'
व्यास ने बताया, नाटक \\\"बंदे में था दम\\\' राष्ट्रपिता गांधीजी की 12 मार्च को की गई दांडी यात्रा की कहानी पर आधारित है। गांधी ने अहिंसा आंदोलन चलाकर यह संदेश किया कि किसी भी बदलाव के लिए हिंसा की जरूरत नहीं। नाटक में दीपिका, गरिमा, सुधांशु और ईशान सहित करीब 10 कलाकार हिस्सा लेंगे। इसी तरह एड्स अवेयरनेस आधारित नाटक \\\"टच मी\\\' में एड्स बीमारी के बारे में जानकारी दी जाएगी और ये बताया जाएगा कि एड्स के रोगी को कैसा माहौल दिया जाना चाहिए। ये नाटक असलम परवेज का लिखा है और व्यास खुद ही इसे निर्देशित कर रहे हैं हैं। नाटक की अवधि 45 मिनट की है।