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जिस बर्थ का कंफर्म टिकट वत कोच में नहीं, कुर्सियों पर बैठो तो स्क्रू चुभ रहे, एस्केलेटर है पर चलता नहीं

Jodhpur News - जोधपुर। रेलवे भले ही यात्रियों को सुखद सफर देने की बात करता हो, लेकिन यात्रियों की शिकायतों से पता चल रहा है कि...

Nov 20, 2019, 07:00 PM IST
Jodhpur News - rajasthan news the berth whose confirmed ticket is not in the vat coach if you sit on the chairs the screws are piercing there is an escalator but it does not move
जोधपुर। रेलवे भले ही यात्रियों को सुखद सफर देने की बात करता हो, लेकिन यात्रियों की शिकायतों से पता चल रहा है कि रेलवे के जिम्मेदार ढंग से अपना काम नहीं कर रहे हैं। ट्रेन के कोच में गंदगी व गंदे टॉयलेट से तो यात्री जूझते ही हैं, लेकिन उस वक्त क्या हालात होंगे जब यात्री कंफर्म बर्थ का टिकट लेकर कोच में पहुंचे और वह बर्थ कोच में हो ही नहीं। ऐसा ही कुछ जैसलमेर-बांद्रा टर्मिनस के स्लीपर कोच में हुआ। शिकायत के कई घंटे तक सुनवाई ही नहीं हुई। एक यात्री को सीट ही ऐसी दी गई कि पूरे सफर के दौरान सीट के स्क्रू चुभते रहे। वहीं यात्री सुविधा के लिए लगाया एस्केलेटर यात्रियों के ही काम नहीं आ रहा।

1. एस्केलेटर पर लगेज लेकर खुद पैदल चलो, वह नहीं चलेगा

हावड़ा सुपरफास्ट में जोधपुर से कानपुर जाने के लिए सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचे अनंत चतुर्वेदी व अक्षत चतुर्वेदी लगेज भारी होने के कारण एस्केलेटर के पास पहुंचे। इनकी ट्रेन दूसरे प्लेटफार्म से जानी थी। ऐसे में एस्केलेटर ही बेहतर माध्यम था, लेकिन ट्रेन के समय के दौरान ही रेलवे का एस्केलेटर बंद मिला। अनंत ने प्लेटफार्म पर पहुंच उसी समय या त्रियों से जुड़ी सुविधा के काम नहीं करने की लिखित में जानकारी रेलवे को दी। दरअसल, ऐसी शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है जब ट्रेन के समय एस्केलेटर बंद मिलता है।

2. सैकंड सीटिंग की कुर्सियों के हत्थे पर स्क्रू निकले

ट्रेन संख्या 14801 जोधपुर-इंदौर में यात्रा कर रहे हर्षद बोहरा को रेलवे ने लोहे के स्क्रू की चुभन का अहसास करवाया। बोहरा इस ट्रेन के डी-1 कोच में थे। उनकी सीट संख्या 97, 99 व 98 थी। इन सीट के हैंडल बहुत ही खराब हो गए हैं। नीचे से ऊपर की साइड में स्क्रू निकले हुए हैं और यात्री की सीट के सामने जो स्टैंड हैं, वह एक सीट पर था ही नहीं, और दो दूसरी सीट के टूटे हुए थे। सीट के हैंडल पर हाथ रखते ही स्क्रू की चुभन से हाथ हटाना पड़ता था। पूरे रास्ते हाथों को हैंडल पर नहीं रख पाने से दिक्कत उठानी पड़ी।

3. ट्रेन चलने के तीन घंटे तक टीटीई बर्थ नहीं दे सका

फरहान सहित 6 यात्री ट्रेन संख्या 22932 के स्लीपर कोच एस-3 में जैसलमेर से बांद्रा टर्मिनस तक की यात्रा कर रहे थे। इन्हें रेलवे ने इस कोच में 79 व 80 नंबर की सीट भी आवंटित की। जब ट्रेन में पहुंचे तो पता चला कि इन नंबर की तो सीट ही नहीं है। ट्रेन जैसलमेर से रवाना होने पर यात्रियों ने टीटीई से अपनी सीट की व्यवस्था करने को कहा। टीटीई खाली सीट ढूंढ़ने के बाद देने का कहकर चला गया। करीब तीन घंटे तक यात्री अपनी सीट के लिए भटकते रहे। यात्री के सहकर्मी आनंद गुप्ता ने भी इस परेशानी को लेकर रेलवे कंट्रोल और रेलवे के सोशल मीडिया पर कार्यरत अधिकारियों तक इस परेशानी को पहुंचाया, लेकिन राहत की जगह केवल आश्वासन ही मिलता रहा।

ट्रेन संख्या 14801 जोधपुर-इंदौर में यात्रा कर रहे हर्षद बोहरा को रेलवे ने लोहे के स्क्रू की चुभन का अहसास करवाया। बोहरा इस ट्रेन के डी-1 कोच में थे। उनकी सीट संख्या 97, 99 व 98 थी। इन सीट के हैंडल बहुत ही खराब हो गए हैं। नीचे से ऊपर की साइड में स्क्रू निकले हुए हैं और यात्री की सीट के सामने जो स्टैंड हैं, वह एक सीट पर था ही नहीं, और दो दूसरी सीट के टूटे हुए थे। सीट के हैंडल पर हाथ रखते ही स्क्रू की चुभन से हाथ हटाना पड़ता था। पूरे रास्ते हाथों को हैंडल पर नहीं रख पाने से दिक्कत उठानी पड़ी।

फरहान सहित 6 यात्री ट्रेन संख्या 22932 के स्लीपर कोच एस-3 में जैसलमेर से बांद्रा टर्मिनस तक की यात्रा कर रहे थे। इन्हें रेलवे ने इस कोच में 79 व 80 नंबर की सीट भी आवंटित की। जब ट्रेन में पहुंचे तो पता चला कि इन नंबर की तो सीट ही नहीं है। ट्रेन जैसलमेर से रवाना होने पर यात्रियों ने टीटीई से अपनी सीट की व्यवस्था करने को कहा। टीटीई खाली सीट ढूंढ़ने के बाद देने का कहकर चला गया। करीब तीन घंटे तक यात्री अपनी सीट के लिए भटकते रहे। यात्री के सहकर्मी आनंद गुप्ता ने भी इस परेशानी को लेकर रेलवे कंट्रोल और रेलवे के सोशल मीडिया पर कार्यरत अधिकारियों तक इस परेशानी को पहुंचाया, लेकिन राहत की जगह केवल आश्वासन ही मिलता रहा।

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