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क्लब संविधान में बदलाव को विभाग ने माना गलत, कहा- कार्रवाई का अधिकार कोर्ट को

एक वर्ष पहले
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उम्मेद क्लब चुनाव को लेकर उप रजिस्ट्रार संस्थाएं की ओर से जयपुर मुख्यालय भेजे पत्र में एक जवाब ने चौंका दिया है। इसमें लिखा है कि उम्मेद क्लब की मौजूदा कार्यकारिणी की ओर से अनुच्छेद 8.5 में किया गया संशोधन संविधान की धारा 12 के तहत गलत है। पत्र भेजने वाले अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस संबंध में उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां विभाग को कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है।

उम्मेद क्लब के चुनाव से पहले चल रहे शिकायतों के दौर के बीच क्लब सदस्य अरविंद कच्छवाहा ने जयपुर जाकर प्रमुख सचिव व रजिस्ट्रार संस्थाएं से शिकायत की। उनका कहना था कि क्लब पदाधिकारियों की ओर से संविधान में गलत ढंग से बदलाव किया गया है और इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस पर 6 मार्च को जयपुर मुख्यालय से एक पत्र स्थानीय कार्यालय भेजा गया और इस मामले में नियम के अधीन तथ्यों की जांच कर 3 दिन में जवाब देने के लिए कहा गया। इसी आधार पर जोधपुर कार्यालय की ओर से उम्मेद क्लब प्रशासन काे पत्र भेजा तथा उनसे इस संबंध में जवाब मांगा। क्लब से जवाब नहीं मिलने पर अब डिप्टी रजिस्ट्रार संस्थाएं बृजेश सिंह भाटी ने मुख्यालय को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि 8.5 में संशोधन की प्रक्रिया नियमानुसार नहीं की गई है। इसमें संविधान की धारा 12 की पालना नहीं हुई है और उन्होंने मुख्यालय को धारा 8.5 को गलत मानते हुए इसका कार्यालय से अनुमोदन व प्रमाणीकरण से इनकार किया है।

क्लब ने केवल जवाब भेजा

जयपुर मुख्यालय से पूछा गया था कि धारा 12 व 4 की पालना हुई अथवा नहीं, इस संबंध में हमने तथ्यों के आधार पर जांच कर ली है। क्लब की ओर से केवल कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक कर 8.5 में पूर्व में किए गए संशोधन की प्रक्रिया को गलत मानते हुए इस बदलाव को शून्य मान इससे पूर्व चल रहे नियम के आधार पर चुनाव करवाने का निर्णय लिया। यह महज एक जवाब है, लेकिन संशोधन करने के लिए तय प्रणाली का उपयोग नहीं किया गया है। इसीलिए धारा 12 का उल्लंघन है तथा यह बदलाव गलत है। कार्रवाई का अधिकार केवल न्यायालय को है।
- बृजेश कुमार भाटी, उप रजिस्ट्रार पंजीयन

सचिव बोले- संविधान में पूर्व में संशोधन ही नहीं हुआ, हमने तो त्रुटि सुधारी थी

उम्मेद क्लब के सचिव विनय कवाड़ का कहना है कि संविधान में पूर्व में संशोधन हुआ ही नहीं, ये तो त्रुटि थी, जिसे हमने सुधार दिया है। जयपुर से आए पत्र के आधार पर जांच करवाई गई, तब यह स्पष्ट हुआ तो हमने इस गलती को सुधार दिया। इसीलिए पूर्व में जो नियम चलता था, उसके आधार पर चुनाव करवाने का निर्णय हुआ।

ये होनी चाहिए थी प्रक्रिया

{30 िदन के गैप से दो आम सभाएं बुलानी थीं।

{पहली आमसभा में प्रस्ताव रखा जाता च दाे तिहाई बहुमत से पारित करवाना था।

{दूसरी आमसभा में प्रस्तावों पर लिए गए प्रस्तावों की पुष्टि करवाई जानी थी।

पूर्व सचिव ने कहा- पहले वाले चुनाव भी गलत थे

पूर्व सचिव विनोद सिंघवी का कहना है कि जब पिछले वर्ष चुनावों में इसे लागू किया गया तो सचिव की ओर से इसे गलत नहीं माना और चार नामांकन रद्द हो गए। यदि मौजूदा पदाधिकारियों का यह कहना है कि यह बदलाव संशोधन गलत था तो फिर पिछले चुनाव भी गलत थे, तो फिर वे चुनाव ही रद्द करने चाहिए।
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