• Hindi News
  • Rajasthan
  • Jodhpur
  • Jodhpur News rajasthan news we will also have to save from drop to drop then in three months we will fill kaylana takhatsagar and surpura savings pending closure in clauser

जलसंकट से बचने को हमें भी बूंद-बूंद बचानी हाेगी, तब तीन माह में भरेंगे कायलाना, तखतसागर व सुरपुरा, बचत+पाेंडिंग=क्लाेजर में किल्लत टलेगी

Jodhpur News - जलाशयों में सिर्फ 7 दिन का पानी शेष, शहर में पखवाड़े व गांव में साप्ताहिक कटौती से भी नहीं मिल रही राहत डीडी वैष्णव |...

Nov 18, 2019, 09:21 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news we will also have to save from drop to drop then in three months we will fill kaylana takhatsagar and surpura savings pending closure in clauser
जलाशयों में सिर्फ 7 दिन का पानी शेष, शहर में पखवाड़े व गांव में साप्ताहिक कटौती से भी नहीं मिल रही राहत

डीडी वैष्णव | जोधपुर

जोधपुर में मार्च से फिर जल संकट गहरा सकता है। कारण, पंजाब सरकार ने अपने हिस्से की नहर की रिपेयरिंग के टेंडर जारी कर दिए हैं। ऐसे में इंदिरा गांधी नहर में 30 मार्च 2020 से प्रस्तावित 70 दिन का क्लोजर होना तय है। क्लोजर 30 मार्च से शुरू होगा, जो 10 जून तक चलेगा। इसकी अवधि घटकर 30 दिन होना संभव नहीं है। पानी के आसन्न संकट में पूरे 70 दिन निकालना बेहद दुश्कर है। स्थिति बेहद नाजुक तब नजर आती है जब पता चलता है कि कायलाना-तखतसागर में 202 एमसीएफटी पानी ही है। इसमें से 120 एमसीएफटी डेड स्टोरेज निकाल दें तो शेष 82 एमसीएफटी से एक सप्ताह ही सप्लाई हो सकती है। ऐसे में क्लोजर का इंतजाम करने का विभाग के पास अभी कोई प्लान नहीं है। पीएचईडी ने शहर में हर पखवाड़े व ग्रामीण क्षेत्र में हर सप्ताह शटडाउन शुरू किया है। इससे ज्यादा पानी की बचत नहीं हो पा रही है। इस जलसंकट में शहरवासियों को सुचारू सप्लाई के लिए दैनिक भास्कर ने ऐसी परिस्थितयों का सफलतापूर्वक सामना कर चुके जल विशेषज्ञों से बात की। उन्होंने बताया कि कुछ उपाय अपनाकर शहर इस संकट के समय को सफलापूर्वक निकाल सकता है। इसके लिए एक-एक शहरवासी को भी बूंद-बूंद बचाकर योगदान देना होगा।

1

नहर में पोंडिंग से 30 दिन तक के पानी का इंतजाम तो हो जाएगा।

बचे 40 दिन के लिए जलापूर्ति को अब तीन दिन में एक बार करना होगा। इससे रोजाना 3 से 4 एमसीएफटी पानी की बचत होगी।

शहर में बढ़ते भूजल को पीने के अलावा अन्य कार्यों के लिए सप्लाई करना होगा।

2

3

4 एमसीएफटी राेज बचत से 3 माह में भरेंगे जलाशय

इन सारे उपायों को करने के बाद रोजाना 4 एमसीएफटी पानी की बचत होगी। यानी एक माह में 120 एमसीएफटी पानी बचेगा। अभी कायलाना-तखतसागर की क्षमता 405 एमसीएफटी है जिसमें 120 एमसीएफटी डेड स्टाेरेज में रहता है। अभी यहां 215 एमसीएफटी पानी ही भरा है। इसे पूरा भरने के लिए 285 एमसीएफटी पानी काे हम 71 दिन की बचा पाएंगे। वहीं सुरपुरा की क्षमता 90 एमसीएफटी है। इसमें अभी 25-30 एमसीएफटी पानी ही है। हमारी 15 दिन की बचत से शेष 60 एमसीएफटी पानी भर पाएगा। यानी पूरे तीन महीने में हम दाेनाें जलाशयाें काे भर पाएंगे। यानी पाेंडिंग की बचत एवं इन उपायाें काे अपनाकर हम 60 दिन का पानी ताे बचा ही लेंगे। इतना हाेने पर बचे 10 दिन का इंतजाम करना भी मुश्किल नहीं होगी।

शहर में कई जगह काम लिया जा रहा भूजल

शहर में बढ़ते भूजल को रोकने के लिए पीएचईडी अभी 104 जलस्त्राेताें से रोजाना 35 एमएलडी पानी का दोहन कर रही हैं। ये पानी कुछ बड़े उपभोक्ताओं को छोड़कर सीवरेज या जोजरी नदी में ही बहाया जा रहा है। ट्यूबवेल व बावड़ियों से निकलने वाला ये पानी पीने योग्य तो नहीं है, लेकिन इसका रोजमर्रा के काम में उपयोग हो सकता है। इससे गार्डन-गमलों में पानी देन, कपड़े धाेना, घर अांगन की धुलाई जैसे पेयजल को छोड़कर अन्य रोजमर्रा के कार्य हो सकते हैं। पीएचईडी अभी रातानाडा में भास्कर चौराहा, हाउसिंग बोर्ड, सरदारपुरा में कुछ इलाकों में इस भूजल की सप्लाई कर रहा है। इस पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद नहर से आने वाले पानी की बचत हो सकती है।

सप्लाई को यूं संभालना होगा

अभी शहर की 15 लाख से ज्यादा की आबादी के लिए रोजाना 370 एमएलडी पानी की मांग है। जबकि पीएचईडी 250 एमएलडी पानी की सप्लाई कर रहा है। शहर में 300 जोन बने हुए हैं। इनमें एक दिन में 150 जोन में 250 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है। तीन दिन में एक बार सप्लाई शुरू करने पर शहर को 100 जोन में बांटना पड़ेगा। इसमें रोजाना 100 से 125 एमएलडी पानी की सप्लाई करनी होगी। साथ ही जलापूर्ति का समय भी दो से तीन घंटे करना होगा।

क्लोजर अवधि में बदलाव की स्थिति अफसरों को साफ नहीं

पीएचईडी के सिटी एसई दिनेश कुमार पेडीवाल ने बताया कि फिलहाल क्लोजर की अवधि कम करने को लेकर बात नहीं हुई है। अवधि कम कराने के लिए विभाग के उच्च स्तर से बातचीत की जा रही हैं। पीएचईडी के एडिशनल चीफ इंजीनियर नीरज माथुर ने बताया कि नहर की रिपेयरिंग के लिए टेंडर जारी होने के बावजूद हम क्लोजर की अवधि 30 दिन करवाने का प्रयास कर रहे हैं। अवधि कम नहीं हुई तो फिर वैकल्पिक इंतजामों पर अभी से काम शुरू किया जाएगा।

सरकार ने अब तक सुध नहीं ली

एक माह पहले 70 दिन का क्लोजर मंजूर होने के बाद राजस्थान सरकार के स्तर पर अवधि कम करवाने का कोई प्रयास ही नहीं किया गया। अब तक सिर्फ जल संसाधन विभाग और पीएचईडी के प्रमुख शासन सचिव ही आपस में बातचीत कर रहे हैं। पंजाब व राजस्थान दोनों जगह कांग्रेस की सरकार है। सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप से राहत मिल सकती है, लेकिन एेसा हाेना निश्चित नहीं है। यहां तक कि क्लोजर को लेकर सरकार के स्तर पर किसी तरह का निर्णय नहीं होने के कारण अभी विभाग की तैयारी शुरू नहीं हो सकी है।

क्लोजर भी जरूरी क्याेंकि नहर जर्जर हुई

इंदिरा गांधी नहर दिनाेदिन जर्जर हाेती जा रही है। पंजाब पर लगातार नहर की मरम्मत का दबाव पड़ रहा है। बीते तीन साल से पंजाब टेंडर लगा रहा, लेकिन मरम्मत नहीं हाे पा रही है पर इस बार टेंडर लग गए। इस साल 70 दिन की नहरबंदी सफल हाे गई ताे अाने वाले दाे साल अाैर लगातार 70-70 दिन की नहरबंदी हाेगी क्याेंकि लाइनिंग ठीक करनी है अाैर नहर की मरम्मत हाेगी। इससे पंजाब से राजस्थान काे पूरा पानी मिल सके। आईजीएनपी के चीफ इंजीनियर विनोद मित्तल ने बताया कि पंजाब क्षेत्र में नहर की मरम्मत का प्राेग्राम तय होने के बाद इसके टेंडर जारी किए गए हैं। इसके चलते क्लोजर की अवधि कम होना संभव नहीं है। 23 मार्च काे रबी का रेग्युलेशन खत्म हाेते ही क्लोजर शुरू होगा।

X
Jodhpur News - rajasthan news we will also have to save from drop to drop then in three months we will fill kaylana takhatsagar and surpura savings pending closure in clauser
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना