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जहां नारी का सम्मान, वहां देव कृपा के साथ सभी का उत्थान

एक वर्ष पहले
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गांधारी } दुर्योधन की माता गांधारी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। इस वजह से उसे अपने पुत्रों के सही-गलत कर्मों दिखाई ही नहीं दिए। गांधारी का प्रतीकात्मक संदेश ये है कि जो माता पुत्र मोह में आंखों पर पट्टी बांध लेती है और बच्चों को सही संस्कार नहीं देती है, उसकी संतान का भविष्य बिगड़ जाता है।

मंदोदरी } रामायण के अनुसार रावण की प|ी मंदोदरी हमेशा अपने पति का हित चाहती थीं। सीता हरण के बाद मंदोदरी ने रावण को काफी समझाया कि सीता को ससम्मान लौटा दे, लेकिन अहंकार की वजह से रावण ने ये बात नहीं मानी और उसका अंत हो गया। मंदोदरी-रावण के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि जीवनसाथी की सही सलाह तुरंत मान लेनी चाहिए।


कुंती } महाराज पांडु की मृत्यु के बाद कुंती ने अभावों में पांचों पांडव पुत्रों को अच्छे संस्कार दिए। धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया। कुंती के संस्कारों की वजह से ही सभी पांडव हमेशा धर्म के मार्ग पर चले और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त की। जो लोग हर कदम धर्म का साथ देते हैं, उन्हें ईश्वर की कृपा जरूर मिलती है।


सीता } रामायण में रावण ने माता सीता का हरण किया था। सीता को बलपूर्वक अपनी लंका की अशोक वाटिका में बंधक बनाकर रखा था। रावण के इस कृत्य की वजह से ही श्रीराम ने उसके पूरे कुल को नष्ट कर दिया। रामायण का यही संदेश है कि महिलाओं का अपमान करने वाले लोग बर्बाद हो जाते हैं, इसीलिए महिलाओं का हमेशा सम्मान करें।


द्रौपदी }महाभारत में द्रौपदी महत्वपूर्ण पात्रों में से एक है। दुर्योधन ने हस्तिनापुर की भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया था। इसी अपमान की वजह से उसके पूरे कौरव वंश का नाश हो गया। महाभारत का संदेश यही है कि महिलाओं का हर परिस्थिति में पूरा सम्मान करना चाहिए।


अनसूया } श्रीरामचरित मानस में श्रीराम और सीता अत्रि मुनि के आश्रम के गए थे। वहां सीता ने अनसूया से भेंट की थी। अनसूया को उनके सतीत्व की वजह से पूजनीय माना गया है। प्रचलित कथा के अनुसार अनसूया ने ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी को अपने सतीत्व के बल से नवजात शिशु बना दिया था। तभी से अनसूया को सुबह स्मरणीय और पूजनीय माना गया है।


ग्रंथों में बताया गया है कि जिन घरों में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इस संबंध में एक श्लोक बहुत प्रचलित है- यत्र नार्यस्तु पूज्यंते तत्र रमन्ते देवता। इसका अर्थ यह है कि जहां नारी की पूजा यानी सम्मान होता है, वहां देव कृपा या देव वास होता है। अगर घर-परिवार में कोई भी स्त्री अपमानित या उपेक्षित होती है तो इसका बुरा असर पूरे परिवार पर होता है। जैसे सीता का अपमान रावण ने और दुर्योधन ने द्रौपदी को अपमानित किया था, दोनों का पूरा कुल ही नष्ट हो गया।

रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस अवसर पर जानिए ग्रंथों की ऐसी सात महिलाओं के बारे में, जिन्होंने ये संदेश दिया कि महिलाएं हमेशा सम्मानीय हैं, जो महिलाओं का अपमान करता है, वह बर्बाद हो सकता है।

उर्मिला }सीता की एक बहन का नाम उर्मिला था। उर्मिला का विवाह लक्ष्मण के साथ हुआ था। श्रीराम और सीता के साथ लक्ष्मण भी वनवास गए थे। इस वजह से उर्मिला को पति के बिना 14 वर्षों तक एक संन्यासी की तरह रहना पड़ा। इसी त्याग की वजह से उर्मिला को पूजनीय माना गया है।
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