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चिंता... एनजीटी की टेक्सटाइल-स्टील इंडस्ट्रीज में बोरवेल इस्तेमाल पर रोक आरओ प्लांट नहीं लगाया तो 418 उद्योग और 10 हजार रोजगार पर संकट

Jodhpur News - शहर में चल रही टेक्सटाइल और स्टील इकाइयों को अब नई चुनौती का सामना करना पड़ेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:00 AM IST
Jodhpur News - rajasthan news worry if ra plant is not stopped at the use of borwel in the ngt39s textile steel industries 418 industries and 10 thousand employment crisis
शहर में चल रही टेक्सटाइल और स्टील इकाइयों को अब नई चुनौती का सामना करना पड़ेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया है कि इंडस्ट्री में अगर बोरवेल है तो उस पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। टैंकर से पानी मंगवाने अथवा भेजने पर पहले ही रोक लगी हुई है। इंडस्ट्री के लिए केवल उपचारित या रीसाइकिल पानी ही इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए उन्हें सामूहिक रूप से आरओ प्लांट लगवाना होगा। शहर में

स्टील की 100 व टेक्सटाइल की करीब 318 इंडस्ट्रीज हैं। आरओ प्लांट की कीमत करीब 30 करोड़ रु. है। यह राशि सभी उद्यमी वहन करते हैं तो प्रत्येक को 7 लाख रु. से अधिक देने होंगे। अब उद्यमी हैरान और परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बिना पानी के इन उद्योगों को कैसे चलाएं। इन उद्योगों से करीब 10 हजार लोगों को रोजगार भी मिलता है। गौरतलब है कि इन इकाइयों में से अधिकांश ने बोरवेल खुदवा रखे हैं। इनसे पानी निकालकर ही टेक्सटाइल और स्टील उद्यमी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अब इन उद्योगों के पास पानी के पुन: इस्तेमाल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। एनजीटी ने अपने निर्देश में यहां तक कहा कि अगर किसी ने बोरवेल के लिए आवेदन किया है तो उसे भी खारिज कर दिया जाए।

गौरतलब है कि अधिकांश इंडस्ट्रीज में बोरवेल हैं, लेकिन यह सारे वैध नहीं हैं। विभाग के पास करीब 111 इंडस्ट्रीज के अावेदन स्वीकृति के लिए अाए थे। हालांकि इन्हें फिलहाल स्वीकृतियां नहीं मिली है। इधर, जोधपुर प्रदूषण निवारण ट्रस्ट भी समस्या का हल ढूंढने मे लगा है। उद्यमियाें ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और महापौर घनश्याम ओझा से मिलकर इस पर चिंता प्रकट की है।

अब क्या होगा: रीसाइकिल या उपचारित पानी ही काम ले सकेंगे

छाेटी यूनिट काे भी चाहिए 10 हजार ली. पानी

दोनों उद्योगों को चलाने के लिए पानी की सबसे अहम आवश्यकता रहती है। छोटी से छोटी इकाई को भी 10 हजार लीटर पानी की आवश्यकता रहती है। वर्तमान में सारी इकाइयां बोरवेल के जरिए पानी की आवश्यकता को पूरा करती हैं। पहले कुछ इकाइयां टैंकर के जरिए पानी मंगवा थी। लेकिन टैंकर से पानी मंगवाने की भी मनाही है।

समाधान: उद्योगों को मिलकर आरओ प्लांट लगाना होगा, कीमत करीब 30 करोड़

चिंतन: महापौर निवास पर जुटे उद्यमी, केंद्रीय मंत्री को बताई परेशानी

उद्योगों पर आए संकट के मद्देनजर जेपीएनटी के ट्रस्टी, वरिष्ठ उद्यमियों आैर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत और महापौर घनश्याम ओझा ने चिंतन किया। उद्यमियों ने अपनी-अपनी चिंता और परेशानी साझा की। शहर में सांगरिया, बासनी में भूजल स्तर, इसके नियम, बोरवेल की एनओसी जैसे मुद्दाें पर विचार विमर्श किया गया। जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत का कहना है कि एनजीटी के आदेश का सम्मान करना सभी का कर्तव्य है। पानी, पर्यावरण और उद्योग, तीनों बचे रहें, इसके लिए मिलकर समाधान निकालेंगे। इसके लिए उद्यमियों के साथ बैठकर बात की गई है।

एनजीटी के नए निर्देश से उद्यमियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। इसका क्या हल निकाला जाए, इसके लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत और महापौर घनश्याम ओझा के साथ उद्यमियांे ने काफी देर तक चर्चा की।

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