जब अदालत में पेश हुई गाय, कोर्ट में गाय को देखने वालों की लग भीड़, पिछले नौ महीने से चल रहा यह विवाद, CCTV कैमरे लगे-रिकॉर्डिंग हुई, DNA टेस्ट तक की बात हुई

राजस्थान न्यूज: जानिए आखिर क्यों कोर्ट में पेश हुई गाय, इस केस में पुलिस की सारी कोशिशें रहीं नाकाम

Bhaskar News

Apr 13, 2019, 04:02 PM IST
Rajasthan News cow produced in jodhpur court in rajastahn in ownership case

क्या है मामला: मंडोर क्षेत्र के एक कांस्टेबल व एक शिक्षक 9 माह से गाय अपनी होने का दावा कर रहे, पुलिस ने निर्णय तक गोशाला भेजा, पूछताछ व रिकॉर्डिंग के बाद भी फैसला नहीं कर पाई

कोर्ट में क्या हुआ: गाय देख भीड़ जुटी, जज ने दोनों पक्षों से गाय के पहचान-निशान के सवाल पूछे, राजीनामा करने अथवा गोशाला को देने को समझाया, अब अगली सुनवाई 15 को।

गाय को कोर्ट क्यों लाना पड़ा: दोनों पक्ष निचली कोर्ट पहुंचे, गाय की कस्टडी मांगी जो खारिज हुई, सेशन कोर्ट ने कहा- 3 माह में करें फैसला, इसलिए तस्दीक करने को गाय बुलवाई।

जोधपुर (राजस्थान)। मंडोर के नयाबास इलाके में एक गाय को लेकर दो पक्षों के बीच मालिकाना हक के 9 महीने पुराने विवाद में शुक्रवार को रोचक मोड़ आया। कोर्ट के आदेश पर मंडोर पुलिस विवादित गाय को लोडिंग टैक्सी में लेकर कोर्ट पहुंची। यहां महानगर मजिस्ट्रेट-3 मदनसिंह चौधरी कोर्ट रूम से बाहर आए और गाय व बछड़े का सत्यापन किया। दोनों पक्षकारों के दावों को लेकर पहचान से जुड़े निशान भी देखे। रिकॉर्ड के तौर पर पक्षकारों के बताए निशानों की रिकॉर्डिंग व फोटोग्राफी करवाई गई। दोनों पक्षों के बयान भी लिए गए।

गाय को गोशाला से लाने-ले जाने का खर्चा दोनों ही पक्षकारों को आधा-आधा वहन करने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। इससे पहले शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे एएसआई मनोहरसिंह लोडिंग टैक्सी में गाय को लेकर कोर्ट परिसर पहुंचे। सुनवाई की बारी आने तक गाय को टैक्सी में ही पार्किंग में 2 घंटे खड़ा रखा। ये दृश्य देखकर लोगों का जमावड़ा लग गया। दोपहर दो बजे पुलिस गाय को लेकर कोर्ट रूम के बाहर पहुंची। जज अधीनस्थ न्यायिक कर्मचारियों के साथ बाहर आए। उन्होंने सबसे पहले परिहार को गाय के पास भेजा और उसके संबंध में बताए तथ्यों की तस्दीक की। इसके बाद दूसरे पक्षकार विश्नोई के दावों की तस्दीक की। जज ने दोनों पक्षकारों के बयान लिए। इससे पहले उन्होंने दोनों पक्षकारों में राजीनामा कराने का प्रयास किया। जज ने कहा कि दोनों ही पक्षकार गाय पर मालिकाना हक छोड़कर इसे स्थाई रूप से गोशाला को सुपुर्द कर दें और पांच-पांच हजार रुपए गोशाला को दें। लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बन पाई। तब जज ने किसी एक पक्षकार को गाय सौंपने का आग्रह भी किया, लेकिन दोनों ही राजी नहीं हुए। गाय को पुलिस के साथ वापस गोशाला भेज दिया गया।

विवाद की हद...

नयाबास निवासी टीचर श्यामसिंह परिहार और डिस्कॉम पुलिस में कांस्टेबल ओमप्रकाश विश्नोई में एक गाय के मालिकाना हक को लेकर अगस्त 2018 से विवाद शुरू हुआ। परिहार ने गाय खुद की बताते हुए कहा था कि गाय खुद का दूध पीती है। चूंकि विवाद के वक्त गाय दूध नहीं दे रही थी, तो मंडोर पुलिस ने गाय को गोशाला भेज दिया। गाय के डिलीवरी होने से पहले गोशाला में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। पुलिस ने करीब 50 घंटों की रिकॉर्डिंग की सीडी बिना किसी निष्कर्ष के कोर्ट में पेश की। परिहार ने पुलिस पर अपने विभाग के कर्मचारी का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए कोर्ट की शरण ली थी। दूसरी ओर दूसरे दावेदार कांस्टेबल विश्नोई ने भी गाय को खुद का बताया था। उनका कहना था गाय की 1 बछड़ी घर पर है। कांस्टेबल ने गाय व बछड़ी का डीएनए टेस्ट करवाने तथा जो झूठा साबित हो उससे टेस्ट का खर्च लेने की बात कही।

कोर्ट आदेश के बाद दर्ज हुआ था केस


परिहार ने कांस्टेबल ओमप्रकाश विश्नोई पर गाय चोरी की एफआईआर पेश की। पुलिस ने दर्ज नहीं किया। शिक्षक ने कोर्ट में इस्तगासा दिया, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया। मामले में एफआर लगा कोर्ट में पेश की। कांस्टेबल ने निचली कोर्ट में गाय सौंपने का आग्रह किया। शिक्षक ने भी इसी धारा में आवेदन किया। कोर्ट ने दोनों आवेदन खारिज किए। दोनों सेशन कोर्ट पहुंचे। वहां से केस फिर महानगर मजिस्ट्रेट को भेज 3 माह में निर्णय के आदेश दिए।

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