रिफ 2019 / सुमित्रा की मांड गायिकी के साथ जुड़े जेविश 'नानी' के सुर, आयरिश और राजस्थानी धुनों के अनूठे संगम से श्रोता मुग्ध



रिफ में प्रस्तुति देते कलाकार। रिफ में प्रस्तुति देते कलाकार।
उपस्थित श्रोता। उपस्थित श्रोता।
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रिफ में प्रस्तुति देते कलाकार।रिफ में प्रस्तुति देते कलाकार।
उपस्थित श्रोता।उपस्थित श्रोता।

  • यहूदी, अफ्रीकन, आयरिश और साथ राजस्थान लोक संस्कृति का मिलन 
  • चोखेलाव बाग के मुख्य स्टेज पर पर 'रिफ' की महफिल सजी 
  • कलाकारों की जुगलबंदी ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित मेहमान झूम उठे
  • देर रात कव्वाली के साथ मेवाती जोगी परंपरा के गीतों का कारवां चलता रहा

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2019, 10:37 AM IST

जोधपुर. राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (रिफ 2019) के 12 वें संस्करण का आगाज तो एक दिन पहले हो गया था, लेकिन पहली बार चोखेलाव बाग के मुख्य स्टेज पर एक साथ चार लोक संस्कृतियों का मिलन हुआ। इजराइली पॉप स्टार नोआम वाज़ाना 'नानी' के साथ रि यूनियन के वोतीआ बैंड, आयरिश बैंड की राजस्थानी लोक कलाकारों के साथ कॉलिब्रेशन से नई धुनों की रचना हुई। वहीं मांड गायिका सुमित्रा देवी के साथ मोहिनी व गंगा ने अपनी खनकती आवाज का जादू बिखेरा। शरद पूर्णिमा से दो दिन पहले चांदनी रात में देर तक दिन सुर ताल का जादू संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोला।


भारत में पहली बार आयरिश बैंड की प्रस्तुति हो रही है। बैंड में शामिल सारा ई कुलेन, मार्टिन कॉयल, पॉल कटलिफ के साथ राजस्थानी लोक कलाकार असिन खान लंगा, सवाई खान व मांगनियारों द्वारा बाजुकी, यूलेनियन पाइप, सीटी, सिंधी सारंगी, ढोलक, मोरचंग, भपंग, खड़ताल पर जुगलबंदी की प्रस्तुति से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। समां ऐसा बांधा कि देर रात दर्शक झूमते व गीतों के सुर में डूबते उतरते नजर आए। मूडी रिफ के तहत समारोह का आगाज जोगी कालबेलिया परंपरा पर आधारित मोहिनी व सुमित्रा देवी की बुलंद गायकी से हुआ। इसके साथ ही युवा एवं अग्रणी संगीतज्ञ नोम नानी वजाना जिनका स्टेज वर्तमान में एमस्टर्डम तथा मोरक्को में नानी के नाम से गायक के क्षेत्र में प्रसिद्ध है, उनके द्वारा मुख्य मंच पर पियानो वादक, गायन एवं संगीत की मनभावन प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात मलोया, रियूनियन आइसलैंड की क्रियोल संस्कृति का जीवंत प्रतीक मलोया की प्रस्तुति भी प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। शाम को लिविंग लैंजेंड के दौरान धन्ना भियां छतरी के पास आयोजित लिविंग लीजेंड्स में जसनाथ जी के भोपे द्वारा अग्नि नृत्य की प्रस्तुति दर्शकों को रोमांचित कर दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर कर दिया। अंगारों पर नृत्य की यह परंपरा एक अद्वितीय परंपरा है जिसके तहत कलाकार द्वारा नियमित अभ्यास और इन्द्रियों पर नियंत्रण के बल पर ही इस रोमांचक नृत्य को बखूबी अंजाम दे पाता है।
 
डेजर्ट लाउंज देर रात जोगी परंपरा के गीत गूंजे
डेजर्ट लाउंज के दौरान अंतिम मेहरानगढ़ की पहाड़ियों में स्थित राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क में बाबूलाल जोगी व साथियों ने दिल को छू लेने वाली जोगी समुदाय की मेवाती संगीत पर आधारित राजस्थानी व्यंग्यपूर्ण छंदों, चुटकीली तथा मिथकों पर कथाओं की संगीतमय प्रस्तुति दी। साथ ही युवा लंगा मांगनियार संगीतज्ञों द्वारा ऊर्जायुक्त पारम्परिक लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई। तत्पश्चात् रामपुर शेषवान घराना के दानिश हुसैन बदायूंनी द्वारा सूफी कव्वाली की प्रस्तुति देकर धवल चांदनी रात को सुरमयी बना दिया।


हर जगह लोक नृत्य व गीतों प्रस्तुति
यहां मेहरानगढ़ म्यूजियम में आने वाले पर्यटकों के लिए राजस्थान की जड़ों से जुड़े पारंपरिक गैर नृत्य, पुरुषों द्वारा किया जाने वाला चंग नृत्य प्रस्तुति सहित डेरू नृत्य की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को लुभाए रखा। भील समुदाय की नृत्य शैली आंगी-बंगी गैर की आकर्षक प्रस्तुति रही। राजस्थान के विभिन्न कलाकारों ने हास्य कार्यक्रम से दर्शकों व पर्यटकों को अपनी परम्परागत कला से खूब हंस-हंस कर लोट पोट भी कराया।
 

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