हाईकोर्ट / वाड्रा मामले की तय समय से पहले सुनवाई, ईडी ने दर्ज कराई आपत्ति; अब 24 अक्टूबर को होगी सुनवाई

राबर्ट वाड्रा। राबर्ट वाड्रा।
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राबर्ट वाड्रा।राबर्ट वाड्रा।

  • अगली सुनवाई तक राबर्ट वाड्रा की गिरफ्तारी पर रहेगी रोक

दैनिक भास्कर

Sep 26, 2019, 06:23 PM IST

जोधपुर. रॉबर्ट वाड्रा और मौरीन वाड्रा से जुड़े बीकानेर में जमीन की खरीद-फरोख्त में अनियमितता के मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। हाईकोर्ट में आज इस मामले की सुनवाई तय समय से पहले हो गई। ऐसे में जयपुर से आए ईडी के अधिवक्ता एएसजी राज दीपक रस्तोगी कोर्ट में पैरवी नहीं कर पाए। जबकि रॉबर्ट वाड्रा व मौरीन वाड्रा के अधिवक्ता केटीएन तुलसी कोर्ट में उपस्थित थे। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए आगामी 5 नवंबर की तारीख तय कर दी।

 

स्काईलाइट प्राइवेट हॉस्पिटलिटी और महेश नागर मामले में हाईकोर्ट द्वारा जारी की गई सूची में यह मामला 47 व 48 क्रम पर सूचीबद्ध था। सुनवाई के लिए दो बजे का समय अंकित था। लेकिन इस मामले में कोर्ट में क्रम संख्या के अनुरूप सुनवाई कर ली।

बाद में कोर्ट पहुंचे ईडी के वकील ने समय से पूर्व सुनवाई होने को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मामले को सुनने से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा के अधिवक्ताओं पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया। इस दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच तीखी बहस हुई। 

 

रस्तोगी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में करीब 13 बार सुनवाई टल चुकी है। उन्होंने वाड्रा के अधिवक्ता पर डर्टी गेम प्ले करने का आरोप लगाया। रस्तोगी के सहायक बीपी बोहरा की ओर से एक अर्जी कोर्ट में पेश कर इस बात की आपत्ति की गई कि मामले की सुनवाई नियत समय से पहले कैसे की गई। इस पर वहां के अधिवक्ता ने जवाब देने के लिए समय मांगा। 

 

अब 24 नवंबर को रॉबर्ट वाड्रा के अधिवक्ताओं की ओर से सहायक सॉलिसिटर जनरल की ओर से पेश किए गए प्रार्थना पत्र पर जवाब देना होगा। वही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी में उसी दिन मामले पर अंतिम बहस शुरू करने की भी बात रखी है। अगली सुनवाई तक वाड्रा व उनके पार्टनर्स की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी।  
 

क्या है मामला

2007 में वाड्रा ने स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी की शुरुआत की। रॉबर्ट और उनकी मां मौरीन इस कंपनी के डायरेक्टर बनाए गए। बाद में कंपनी का नाम बदलकर स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड लायबिलिटी कर दिया गया। रजिस्ट्रेशन के वक्त बताया गया था कि ये कंपनी रेस्टोरेंट, बार और कैंटीन चलाने जैसे काम करेगी।

 

2012 में खरीदी थी जमीन
वाड्रा की कंपनी ने 2012 में कोलायत क्षेत्र में कुछ दलालों के जरिए 270 बीघा जमीन 79 लाख रुपए में खरीदी। बीकानेर में भारतीय सेना की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के लिए जमीन आवंटित की गई थी। यहां से विस्थापित हुए लोगों के लिए दूसरी जगह पर 1400 बीघा जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार करवाकर वाड्रा की कंपनी को बेच दिए।

यह जमीन सेना की थी और इसका बेचा नहीं जा सकता था। इन लोगों के माध्यम से ही वाड्रा ने क्षेत्र के कुछ गांवों में और जमीन खरीदने का प्रयास किया, लेकिन मामला आगे बढ़ नहीं पाया। फर्जी तरीके से जमीन के बेचने का मामला उजागर होने से पहले वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को 5 करोड़ रुपए में बेच दिया। ईडी ने इस मामले में कुछ स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी है। उनकी मिलीभगत से कुछ लोगों ने जमीन के फर्जी कागजात तैयार कराए। 

 

मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले की ईडी ने जांच शुरू की
मनी लांड्रिंग से जुड़े इस मामले की ईडी ने जांच शुरू की थी। ईडी की पूछताछ से बचने के लिए वाड्रा लंबे अरसे से प्रयास करते रहे। कई बार समन जारी करने के बावजूद वे ईडी के सामने पेश नहीं हुए। ईडी की सख्ती पर वाड्रा ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में अपील दायर कर पूछताछ पर ही सवालिया निशान लगाया। हाईकोर्ट ने वाड्रा को आदेश दिया कि वे 12 फरवरी को अपनी मां मौरिन के साथ ईडी के समक्ष पेश होकर उसके सवालों का जवाब दें। इसके बाद वाड्रा जयपुर में ईडी के समक्ष पेश हुए थे।

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