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जोधपुर / ब्लेड रनर के साथ हौसले के पैरों पर दौड़े शहर के दिव्यांग



ब्लेड रनर के साथ शहर के दिव्यांग लोग भी दौड़े। ब्लेड रनर के साथ शहर के दिव्यांग लोग भी दौड़े।
कोई व्हील चेयर पर आया तो किसी ने सहारे से दौड़ पूरी की। कोई व्हील चेयर पर आया तो किसी ने सहारे से दौड़ पूरी की।
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ब्लेड रनर के साथ शहर के दिव्यांग लोग भी दौड़े।ब्लेड रनर के साथ शहर के दिव्यांग लोग भी दौड़े।
कोई व्हील चेयर पर आया तो किसी ने सहारे से दौड़ पूरी की।कोई व्हील चेयर पर आया तो किसी ने सहारे से दौड़ पूरी की।
  • कारगिल के योद्धा मेजर देवेंद्र पाल सिंह के साथ दिव्यांग और युवाओं ने दौड़ लगाकर एक नया संदेश दिया
  • अगले संस्करण की दौड़ 13 अक्टूबर को अजमेर में और 14 अक्टूबर को जयपुर में होगी

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 03:52 AM IST

जोधपुर. कारगिल के योद्धा मेजर देवेंद्र पाल सिंह के साथ दिव्यांग और युवाओं ने दौड़ लगाकर एक नया संदेश दिया। इस दौड़ में 17 स्कूलों के छात्रों और 190 दिव्यांग ने हिस्सा लिया। इस अभियान की शुरुआत 7 अक्टूबर से शुरू हुई थी। अब तक रन का आयोजन कोटा, उदयपुर व जोधपुर शहर में किया गया है। अगले संस्करण की दौड़ 13 अक्टूबर को अजमेर में और 14 अक्टूबर को जयपुर में होगी।

 

कारगिल युद्ध में एक पैर गंवाने वाले मेजर सिंह भारत के पहले ब्लेड रनर भी हैं और उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स में भी दर्ज है। वे 26 से अधिक मैराथन दौड़ चुके हैं। इस दौड़ में उनकी मौजूदगी से युवाओं में जोश नजर आ रहा था।

 

दुनियाभर में ब्लेड रनर के नाम से दक्षिण अफ्रीका के ऑस्कर पिस्टोरियस फेमस हुए। उन्होंने कई रेस जीतीं। वर्ष 2013 में उनकी चलाई गोली से गर्लफ्रेंड रीवा की मौत हो गई। ऑस्कर को सदोष मानव हत्या में 5 साल की जेल हुई। देवेंद्रपाल सिंह 1999 में कारगिल में दुश्मनों से लोहा लेते गंभीर घायल हुए। उन्हें दांया पैर गंवाना पड़ा, अब भी शरीर में 50 छर्रे मौजूद हैं। खुद का जज्बा बनाए रखने व दिव्यांगों को हौसला देने को वे ब्लेड रनर बने। उन्होंने 26 मैराथन दौड़ीं।

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